दिग्विजय सिंह की RSS पोस्ट पर MP कांग्रेस में घमासान! भोपाल कांग्रेस कार्यालय तक पहुंचा विवाद
Friday, Jan 02, 2026-04:18 PM (IST)
भोपाल : मध्यप्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा आरएसएस की तारीफ करने वाला मामला तूल पकड़ता जा रहा है। एक पोस्ट से शुरु हुआ विवाद अब कांग्रेस के भीतर ही बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। मामले में दिग्विजय सिंह को भाजपा में शामिल होने का ऑफर मिला, वहीं कांग्रेस नेताओं ने उन्हें पार्टी से निष्कासित करने की मांग भी की। लेकिन इसी बीच भोपाल कार्यालय के बाहर लगे पोस्टर से हड़कंप मच गया है। यह पोस्टर पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी की बेटी निधि चतुर्वेदी द्वारा लगाया गया है। जिससे पार्टी के अंदर चल रही गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है।
क्या था निधि चतुर्वेदी का पोस्ट
दरअसल, कुछ दिन पहले कांग्रेस नेता निधि चतुर्वेदी ने राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह पर निशाना साधा था, जिसमें निधि चतुर्वेदी ने फेसबुक पर लंबी पोस्ट लिखी थी कि कांग्रेस की विचारधारा RSS से बिल्कुल अलग है और अगर पार्टी के वरिष्ठ नेता ही संघ की तारीफ करेंगे, तो कार्यकर्ताओं के बीच गलत संदेश जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी अनुशासन सभी के लिए समान होना चाहिए, चाहे नेता कितना भी बड़ा क्यों न हो?
भोपाल कांग्रेस कार्यालय में पोस्टर वार
निधि चतुर्वेदी के बयान के जवाब में दिग्विजय सिंह के समर्थकों ने भोपाल स्थित मध्यप्रदेश कांग्रेस कार्यालय में एक पोस्टर लगाकर उन पर पलटवार किया। पोस्टर में तीखे राजनीतिक संदेश लिखे होने की चर्चा है, जिससे यह साफ हो गया है कि विवाद अब सोशल मीडिया से निकलकर संगठनात्मक स्तर तक पहुंच चुका है।
पहले जयवर्धन सिंह भी कर चुके हैं पोस्ट
इससे पहले दिग्विजय सिंह के बेटे और राघौगढ़ विधायक जयवर्धन सिंह ने भी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की थी, जिसे इसी विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दे दिया।
कांग्रेस के भीतर बढ़ती असहजता
दिग्विजय सिंह और उनके समर्थकों के खिलाफ खुलकर सामने आई प्रतिक्रिया ने कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को उजागर कर दिया है। अब यह विवाद पार्टी नेतृत्व के लिए भी असहज स्थिति बनता नजर आ रहा है, क्योंकि मामला वरिष्ठ नेताओं और उनके समर्थकों के बीच टकराव का रूप ले चुका है। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

