जंगल के अंदर बोरी से आई रोने की आवाज, पास जाकर देखा तो उड़ गए लोगों के होश
Saturday, Feb 07, 2026-03:10 PM (IST)
सतना: जिले के उचेहरा ब्लॉक स्थित विश्वविख्यात भरहुत गांव में शनिवार सुबह इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना सामने आई। जंगल क्षेत्र में पुरातत्व विभाग की बाउंड्रीवाल के भीतर एक नवजात शिशु को बोरी में बंद कर छोड़ दिया गया। गनीमत रही कि समय रहते ग्रामीणों की नजर पड़ी और मासूम की जान बच गई। सुबह शौच के लिए निकले ग्रामीणों को जंगल की ओर से बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। जब वे आवाज का पीछा करते हुए बाउंड्रीवाल के अंदर पहुंचे तो कपड़े में लिपटा एक नवजात बोरी के भीतर पड़ा मिला। यह दृश्य देखकर ग्रामीण सन्न रह गए। तत्काल गांव की सरपंच माया देवी को सूचना दी गई।
जन्म के 1–2 घंटे बाद ही छोड़ा गया, नाड़ा भी नहीं कटा था
सरपंच माया देवी ने बिना देरी किए उचेहरा थाने को सूचना दी। खबर मिलते ही सहायक उपनिरीक्षक संतोष सिंह, आरक्षक संतोष वर्मा, कौशल गुर्जर और महिला आरक्षक शिवानी मेहरा मौके पर पहुंचे। पुलिस ने नवजात को सुरक्षित बाहर निकालकर तत्काल सिविल अस्पताल उचेहरा पहुंचाया।
अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों ने बताया कि बच्चा अस्पताल पहुंचने से महज डेढ़ से दो घंटे पहले ही जन्मा था। नवजात की नाल तक नहीं कटी थी और शरीर ठंडा पड़ चुका था। डॉक्टरों के अनुसार यदि कुछ देर और हो जाती तो बच्चे की जान जा सकती थी।
डॉक्टर बोले—बच्चा पूरी तरह स्वस्थ
उचेहरा अस्पताल के बीएमओ डॉ. एके राय ने बताया कि बच्चे को सुबह करीब 10:30 बजे अस्पताल लाया गया। उस समय नाड़ा लटक रहा था और शरीर पर गंदगी लगी हुई थी। ड्यूटी डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ ने तुरंत नाड़ा काटकर सफाई की और प्राथमिक उपचार दिया। नवजात का वजन साढ़े 3 किलो है और वह पूरी तरह स्वस्थ है। बच्चे को एससीएनयू वार्ड में भर्ती कर जिला अस्पताल सतना रेफर किया गया है, जहां उसकी निगरानी जारी है।
सरपंच बनीं ‘मां’, अस्पताल में संभाली जिम्मेदारी
घटना के बाद सरपंच माया देवी ने मानवीय संवेदना की मिसाल पेश की। वे सुबह से अस्पताल में मौजूद रहकर नवजात की देखभाल कर रही हैं। उन्होंने कहा कि जब तक प्रशासन कोई निर्णय नहीं लेता, तब तक वह बच्चे को अकेला नहीं छोड़ेंगी।
पुलिस जांच में जुटी
पुलिस ने अज्ञात महिला और परिजनों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आसपास के गांवों, अस्पतालों और आंगनबाड़ी केंद्रों से जानकारी जुटाई जा रही है ताकि बच्चे को छोड़ने वालों की पहचान की जा सके। एक ओर जहां यह घटना समाज के लिए शर्मनाक है, वहीं ग्रामीणों, पुलिस और सरपंच की तत्परता ने यह साबित कर दिया कि इंसानियत अभी जिंदा है।

