पूर्व CM को हाईकोर्ट से बड़ा झटका! चुनाव याचिका खारिज करने की मांग नामंजूर
Wednesday, Jun 17, 2026-10:53 AM (IST)
रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और पाटन विधायक भूपेश बघेल को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। उनके निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका को खारिज कराने की कोशिश फिलहाल नाकाम रही है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भूपेश बघेल की वह अर्जी नामंजूर कर दी है, जिसमें उन्होंने चुनाव याचिका को शुरुआती स्तर पर ही खारिज करने की मांग की थी। अब इस मामले में मेरिट के आधार पर नियमित सुनवाई होगी, जिसकी अगली तारीख 23 जून तय की गई है।
दरअसल, दुर्ग सांसद विजय बघेल ने विधानसभा चुनाव 2023 में पाटन सीट से भूपेश बघेल की जीत को चुनौती देते हुए चुनाव याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मतदान से ठीक पहले लागू प्रचार प्रतिबंध अवधि के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने समर्थकों के साथ क्षेत्र में रोड शो और रैली की थी। आरोप है कि इस दौरान चुनावी नारे लगाए गए और मतदाताओं से समर्थन मांगा गया, जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 126 का उल्लंघन है।
मामले की सुनवाई के दौरान भूपेश बघेल की ओर से दलील दी गई कि याचिका में लगाए गए आरोप अस्पष्ट हैं और उन्हें साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के समर्थन में आवश्यक 65-बी प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसलिए याचिका को बिना ट्रायल के ही खारिज किया जाना चाहिए।
हालांकि, जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिका में प्रस्तुत तथ्य प्रथम दृष्टया सुनवाई योग्य हैं और मामले को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद है। कोर्ट ने यह भी कहा कि डिजिटल साक्ष्यों की वैधता, गवाहों की विश्वसनीयता और अन्य तकनीकी आपत्तियों पर फैसला ट्रायल के दौरान साक्ष्य के आधार पर किया जाएगा।
गौरतलब है कि इससे पहले भी भूपेश बघेल की एक अर्जी हाईकोर्ट में खारिज हो चुकी थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें मेंटेनेबिलिटी के मुद्दे पर पुनः हाईकोर्ट में आवेदन प्रस्तुत करने की अनुमति दी थी। उसी के तहत दायर आवेदन को अब हाईकोर्ट ने नामंजूर कर दिया है।
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद यह साफ हो गया है कि भूपेश बघेल की चुनावी जीत को चुनौती देने वाला मामला अब पूरी सुनवाई के दौर से गुजरेगा। राजनीतिक दृष्टि से भी इस मामले पर सबकी निगाहें टिकी हैं, क्योंकि इसके परिणाम का असर प्रदेश की राजनीति पर दूरगामी हो सकता है।

