भाजपा में नियुक्तियों की हलचल तेज! दिग्गज मंत्री की जिद से अटका बड़ा फैसला?
Friday, Aug 14, 2026-05:44 PM (IST)
इंदौर। मध्य प्रदेश में लंबे समय से खाली पड़े राजनीतिक पदों पर नियुक्तियों को लेकर भाजपा संगठन ने एक बार फिर कवायद तेज कर दी है। दतिया चुनाव परिणाम के बाद पार्टी के भीतर यह महसूस किया जा रहा है कि कार्यकर्ताओं की नाराजगी को ज्यादा समय तक नजरअंदाज करना संगठन के लिए भारी पड़ सकता है। यही वजह है कि निगम, मंडल और विकास प्राधिकरणों में नियुक्तियों को लेकर मंथन अब तेज हो गया है। इन नियुक्तियों में इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) सबसे अहम माना जा रहा है। हालांकि अध्यक्ष पद को लेकर सहमति नहीं बन पाने से मामला लगातार उलझा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की पसंद और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की राय के बीच मतभेद इसकी बड़ी वजह बनकर सामने आ रहा है।
कार्यकर्ताओं को साधने की रणनीति
सरकार और संगठन के स्तर पर अब उन राजनीतिक पदों को भरने पर जोर दिया जा रहा है, जो लंबे समय से खाली हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से भी ऐसे पदों के लिए संगठन से नाम मांगे जाने की बात सामने आई है। जिन नियुक्तियों को लेकर ज्यादा विवाद नहीं था, वहां फैसले किए जा चुके हैं, जबकि मतभेद वाली जगहों पर निर्णय टलता रहा।
दतिया के चुनाव परिणाम ने पार्टी के भीतर कार्यकर्ताओं की नाराजगी को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। माना जा रहा है कि अब संगठन जमीनी कार्यकर्ताओं को राजनीतिक जिम्मेदारियां देकर उन्हें सक्रिय और संतुष्ट करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।
IDA अध्यक्ष पर सबसे ज्यादा खींचतान
इंदौर विकास प्राधिकरण में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और संचालक मंडल के सदस्यों की नियुक्ति प्रस्तावित है। चर्चा है कि अध्यक्ष के साथ उपाध्यक्ष समेत करीब आठ नेताओं को संचालक मंडल में जगह मिल सकती है। लेकिन पूरी कवायद का सबसे बड़ा सवाल अध्यक्ष के नाम को लेकर है।
संगठन की कोशिश ऐसे चेहरे को आगे बढ़ाने की है, जिसकी स्वीकार्यता अलग-अलग गुटों में हो और जिसे लेकर कार्यकर्ताओं के बीच भी सकारात्मक संदेश जाए। इसी कारण किसी एक नाम पर अंतिम मुहर लगाना आसान नहीं हो रहा है।
विजयवर्गीय की पसंद अलग, स्थानीय नेताओं की राय अलग
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की ओर से एक नाम को प्राथमिकता दिए जाने की चर्चा है। विजयवर्गीय का तर्क बताया जा रहा है कि IDA उनके विभाग से जुड़ा है और इंदौर उनका राजनीतिक क्षेत्र भी है, इसलिए अध्यक्ष के चयन में उनकी राय को महत्व मिलना चाहिए।
दूसरी ओर सांसद, महापौर और स्थानीय विधायकों की पसंद एक जैसी नहीं बताई जा रही है। अलग-अलग नेताओं ने अपने-अपने नाम सुझाए हैं। कुछ नामों पर सहमति जरूर दिखाई दे रही है, लेकिन अध्यक्ष पद को लेकर अंतिम फैसला अभी भी अटका हुआ है।
सुदर्शन गुप्ता का नाम मजबूत दावेदारों में
IDA अध्यक्ष पद की दौड़ में पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता का नाम भी मजबूती से सामने आया है। संगठन के भीतर उनकी स्वीकार्यता और अलग-अलग जनप्रतिनिधियों के साथ उनके संबंधों को उनकी बड़ी ताकत माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर की ओर से भी गुप्ता के नाम को लेकर सकारात्मक रुख है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की नजदीकी और तवज्जो भी उनके पक्ष में माहौल बनाने वाली बात मानी जा रही है।
इसके अलावा कमलेश शर्मा और मुकेश राजावत के नाम भी चर्चा में हैं। कमलेश शर्मा को संघ पृष्ठभूमि से समर्थन मिलने की बात कही जा रही है, जबकि मुकेश राजावत के पक्ष में ABVP और भाजपा के कुछ नेताओं की सक्रिय पैरवी बताई जा रही है।
फैसला सिर्फ एक नियुक्ति का नहीं, संदेश का भी
IDA अध्यक्ष का फैसला अब केवल एक राजनीतिक नियुक्ति भर नहीं रह गया है। इसके जरिए भाजपा संगठन इंदौर के कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं के बीच संतुलन साधने का प्रयास कर रहा है। ऐसे में पार्टी के सामने चुनौती यह है कि ऐसा नाम चुना जाए, जिससे किसी एक गुट को बढ़त मिलने का संदेश न जाए और कार्यकर्ताओं के बीच भी सकारात्मक संकेत पहुंचे।
फिलहाल निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संगठन विजयवर्गीय की पसंद को आगे बढ़ाता है या व्यापक सहमति वाले चेहरे पर दांव लगाता है। IDA की नियुक्ति का फैसला इंदौर भाजपा की अंदरूनी राजनीति में आने वाले दिनों की दिशा भी तय कर सकता है।

