भाजपा के दिग्गज विधायक का निधन, शिक्षक की नौकरी छोड़ राजनीति में आए, 2008 में पहली बार बने थे MLA, फिर ऐसे छुई बुलंदियां
Friday, Oct 30, 2026-06:46 PM (IST)
रायपुर: छत्तीसगढ़ की अहिवारा विधानसभा सीट से भाजपा विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का 78 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे लंबे समय से फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे थे और हैदराबाद के यशोदा अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन से दुर्ग जिले सहित पूरे छत्तीसगढ़ के राजनीतिक क्षेत्र में शोक की लहर है। कोर्सेवाड़ा का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा। उन्होंने शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं देने के बाद राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में अपनी पहचान बनाई।
शिक्षक की नौकरी से शुरू हुआ सफर, रिटायरमेंट के बाद राजनीति में आए
डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का जन्म 12 अगस्त 1948 को हुआ था। उन्होंने पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर से राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की थी। इसके साथ ही उन्होंने बीएड की डिग्री भी हासिल की। राजनीति में आने से पहले उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अपना करियर बनाया और व्याख्याता के पद पर कार्य किया।
वर्ष 1998 में व्याख्याता पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति की राह चुनी। इसके अगले ही साल यानी 1999 में वे दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के तत्कालीन सांसद के निजी सहायक के रूप में भी कार्य करने लगे। यहीं से उनका राजनीतिक और संगठनात्मक सफर आगे बढ़ा। इसके बाद उन्होंने भाजपा के साथ जुड़कर क्षेत्रीय राजनीति में अपनी सक्रियता बढ़ाई।

2008 में पहली बार मिला विधानसभा पहुंचने का मौका
राजनीति में सक्रिय होने के करीब एक दशक बाद वर्ष 2008 में भाजपा ने उन्हें अहिवारा विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा। पार्टी के इस फैसले के बाद कोर्सेवाड़ा पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर सदन पहुंचे। विधायक बनने के बाद उन्हें वर्ष 2010 में छत्तीसगढ़ विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया गया। इस पद पर उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी मिला। विधानसभा के भीतर भी उन्होंने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग के कल्याण से जुड़ी समितियों में जिम्मेदारियां निभाईं।
2018 में मिली हार, 2023 में फिर की वापसी
वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया और अहिवारा से टिकट दिया। हालांकि, इस चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली। कांग्रेस के गुरु रुद्र कुमार ने यह सीट जीत ली और कोर्सेवाड़ा को विधानसभा से बाहर रहना पड़ा।
लेकिन वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें दोबारा मौका दिया। इस बार उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी निर्मल कोसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा और 25,263 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। कोर्सेवाड़ा को कुल 96,717 वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी को 71,454 मत प्राप्त हुए। इस जीत के साथ उन्होंने दूसरी बार विधानसभा में अपनी जगह बनाई।
2025 में मिली नई जिम्मेदारी
दूसरी बार विधायक बनने के बाद उन्हें विधानसभा की विभिन्न समितियों में भी जिम्मेदारियां सौंपी गईं। इनमें पुस्तकालय समिति के सभापति का पद भी शामिल था। उनकी राजनीतिक वरिष्ठता और अनुभव को देखते हुए अक्टूबर 2025 में छत्तीसगढ़ सरकार ने उन्हें अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष नियुक्त किया। नवंबर 2025 में उन्होंने इस पद का कार्यभार संभाला।
इस तरह वर्ष 1998 में शिक्षक के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद राजनीति में कदम रखने वाले डोमनलाल कोर्सेवाड़ा ने 2008 में पहली बार विधानसभा का चुनाव जीतकर अपने राजनीतिक सफर को नई पहचान दी। 2018 की हार के बाद 2023 में उन्होंने फिर वापसी की और निधन के समय वे अहिवारा से भाजपा विधायक तथा अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके निधन से अहिवारा विधानसभा क्षेत्र ने अपना निर्वाचित प्रतिनिधि खो दिया है। शिक्षा के क्षेत्र से राजनीति तक का उनका सफर उनके सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय रहा

