अपने ही सिस्टम पर बुरे भड़के BJP MLA,कहा-अधिकारी खुद करवा रहे चोरपना,SDM और कलेक्टर का सुनाया किस्सा
Thursday, Jul 30, 2026-11:11 PM (IST)
गुना (मिसबाह नूर):अपनी बेबाक और कई बार विवादास्पद बयानों को लेकर हमेशा राजनीतिक सुर्खियों के केंद्र में रहने वाले गुना के भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा हमला बोला है। गुरुवार को एक सरकारी कार्यशाला के मंच से विधायक शाक्य ने खनिज विभाग के भ्रष्टाचार का पूरा कच्चा चिट्ठा जनता के सामने खोल कर रख दिया। अपने ठेठ और तीखे अंदाज में उन्होंने खनिज अधिकारी को भरे मंच से उस्ताद अधिकारी करार देते हुए आरोप लगाया कि विभाग में जुर्माने के नाम पर अवैध वसूली और अपनी जेबें भरने का खुला खेल चल रहा है।
दरअसल मौका था जिले में स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने और युवाओं को नवाचार आधारित उद्यमिता से जोडऩे के उद्देश्य से एक निजी होटल में आयोजित तेजस कार्यशाला का। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम जिला प्रशासन गुना, उद्योग विभाग, स्टार्टअप सेंटर मध्य प्रदेश तथा भारत सरकार के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था, जिसमें शहर के तमाम उद्योगपति, व्यापारी और युवा उद्यमी शामिल हुए थे। जहां एक ओर कार्यक्रम का मूल विषय युवाओं को रोजगार और नवाचार के लिए प्रेरित करना था, वहीं मंच पर आते ही विधायक पन्नालाल शाक्य का पूरा फोकस प्रशासनिक भ्रष्टाचार और खनिज विभाग की मनमानी पर केंद्रित हो गया, जिससे पूरे हॉल में सन्नाटा खिंच गया और सियासी हलकों में एक नई बहस छिड़ गई।
मंच से खनिज विभाग के भ्रष्टाचार की परतें खोलते हुए विधायक शाक्य ने कहा कि खनिज विभाग असल अपराधियों और अवैध रूप से खनिज बेचने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं करता, बल्कि जो ग्रामीण या किसान जरूरत के लिए सामग्री खरीदकर ले जाता है, उसे जबरन डराकर जुर्माना वसूला जाता है और पूरा चोरपना खुद अधिकारी ही करवा रहे हैं। विधायक शाक्य ने अपनी विधानसभा क्षेत्र के एक किसान के साथ घटे पूरे घटनाक्रम का विस्तार से वृत्तांत सुनाया।
उन्होंने बताया कि उनकी गुना विधानसभा का एक मतदाता किसान अपनी ट्रॉली लेकर कृषि उपज मंडी में अनाज बेचने आया था। अनाज बेचने के बाद वह अपने घर के छोटे-मोटे निर्माण कार्य के लिए एक फड से भसुआ (रेत/बजरी) खरीदकर ट्रॉली में ले जा रहा था। किसान ने फड वाले को विधिवत पैसे दिए थे और वह खुद किसी नदी या तालाब से अवैध उत्खनन करने नहीं गया था। लेकिन रास्ते में खनिज विभाग के अधिकारियों ने उसकी ट्रॉली को पकड़ लिया और उस पर भारी-भरकम जुर्माना ठोंक दिया।
विधायक शाक्य ने बताया कि जब किसान ने उन्हें अपनी परेशानी बताई तो उन्होंने स्वयं खनिज अधिकारी को फोन लगाया। फोन उठाते ही खनिज अधिकारी बड़ी शालीनता का दिखावा करते हुए अरे दादा, अरे दादा करने लगा। इस पर विधायक ने अधिकारी को दो टूक लहजे में कहा कि अरे दादा, अरे दादा मत करो, मेरी पूरी बात ध्यान से सुनो। अमुक नाम का किसान मेरी विधानसभा का मतदाता है, वह नदी-तालाब से चोरी नहीं कर रहा है, बल्कि फड वाले से बाकायदा पैसे देकर भसुआ खरीदकर घर ले जा रहा है, उस पर जुर्माना क्यों लगा रहे हो? इस पर खनिज अधिकारी रटा-रटाया जवाब देते हुए बोला कि भाई साहब, इस पर तो जुर्माना ही होगा।
विधायक ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि यह तो गजब हो गया, आप एक खरीददार को परेशान कर रहे हो। अधिकारी की मनमानी की हद यह थी कि उसने उल्टा किसान से फरमान सुना दिया कि जिस फड वाले से भसुआ खरीदकर लाए हो, पहले उसे यहां बुलाकर लाओ। विधायक ने मंच से सवाल उठाया कि भला यह कहां का न्याय है कि कोई किसान फड वाले व्यापारी को पकडक़र अधिकारी के सामने लाएगा? असल में यह सब कार्रवाई का नाटक सिर्फ अपनी जेबें भरने और अवैध वसूली के लिए किया जा रहा था।
विधायक ने ने बताया कि जब खनिज अधिकारी उनकी बात मानने को तैयार नहीं हुआ तो उन्होंने क्षेत्र की एसडीएम को फोन लगाया और पूरी स्थिति से अवगत कराया। एसडीएम ने आश्वासन दिया कि वह अभी बात करती हैं, लेकिन कुछ देर बाद एसडीएम ने बेहद बेबस और लाचार लहजे में विधायक को वापस फोन करके कहा कि वो अधिकारी तो नहीं छोड़ेगा, उसने तो जुर्माने की रसीद बना दी है।
एसडीएम से कोई समाधान न निकलने पर विधायक शाक्य ने जिले के मुखिया कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल को फोन लगाया। कलेक्टर साहब ने कहा कि वह अभी पूरे मामले की जानकारी लेकर वापस फोन करके बताते हैं। विधायक के मुताबिक उन्होंने पूरे आधे घंटे तक कलेक्टर के फोन का इंतजार किया, लेकिन जब कोई जवाब नहीं आया तो उन्होंने स्वयं दोबारा फोन मिलाया। इस बार कलेक्टर ने यह कहकर पल्ला झाडऩे का प्रयास किया कि उनका फोन व्यस्त था। इस पर विधायक शाक्य का धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने कलेक्टर से दो टूक शब्दों में कहा कि अब बात कर लो पहले फोन व्यस्त था तो या मैं सीधे कलेक्टोरेट आ जाता और वहीं आपके सामने कुर्सी पर बैठकर आमने-सामने बात कर लेता। विधायक के इस बेबाक खुलासे से कार्यशाला में मौजूद सभी अधिकारी असहज नजर आए।
गौर करने वाली बात यह भी रही कि कार्यशाला के दौरान विधायक पन्नालाल शाक्य और कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल के बीच की तल्खी और शीतयुद्ध साफ नजर आया। इस पूरे कार्यक्रम में कलेक्टर और विधायक एक साथ मंच पर दिखाई ही नहीं दिए। पहले कलेक्टर किशोर कन्याल कार्यशाला में पहुंचे और अपनी औपचारिकता पूरी करके निकल गए, उसके बाद विधायक पन्नालाल शाक्य का कार्यक्रम में आगमन हुआ। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों के बीच यह दूरी महज संयोग नहीं, बल्कि पिछले कुछ समय से चल रही प्रशासनिक और सियासी खींचतान का ही परिणाम है।

