Punjab Kesari MP ads

ऐसा क्या हुआ कि खुद गिरफ्तारी देने निकले BJP विधायक रास्ते से ही लौट गए? विपक्ष बोला- बंद करो ये ड्रामा

Saturday, May 30, 2026-05:20 PM (IST)

सरगुजा: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में नायब तहसीलदार से कथित मारपीट के मामले ने अब प्रशासनिक विवाद से आगे बढ़कर बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। एक ओर भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो खुद गिरफ्तारी देने की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक ड्रामेबाजी बता रही है। उधर, प्रदेशभर के राजस्व अधिकारी विधायक और उनके समर्थकों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर आंदोलन के रास्ते पर उतर आए हैं।  शुक्रवार को विधायक रामकुमार टोप्पो ने घोषणा की कि वे सरगुजा आईजी कार्यालय पहुंचकर स्वयं गिरफ्तारी देंगे। उन्होंने इसे प्रदेश की सुशासन व्यवस्था का उदाहरण बताते हुए कहा कि उनके खिलाफ बिना किसी दबाव के एफआईआर दर्ज हुई है, इसलिए वे कानून का सम्मान करते हुए गिरफ्तारी भी देंगे। हालांकि अंबिकापुर पहुंचने से पहले ही बतौली क्षेत्र में समर्थकों ने उनका काफिला रोक लिया, जिसके बाद वे वापस सीतापुर लौट गए।

दिलचस्प बात यह रही कि गिरफ्तारी देने का दावा करने वाले विधायक आखिरकार आईजी कार्यालय तक पहुंचे ही नहीं। देर शाम तक वे समर्थकों के साथ रेस्ट हाउस में मौजूद रहे। बाद में उन्होंने कहा कि समर्थकों के आग्रह पर वे लौट आए, लेकिन भविष्य में स्वयं गिरफ्तारी देने के अपने निर्णय पर कायम हैं। हालांकि उन्होंने तारीख और समय स्पष्ट नहीं किया।

राजस्व अधिकारियों का आक्रोश, प्रदेशभर में हड़ताल

नायब तहसीलदार से मारपीट की घटना के विरोध में शुक्रवार को प्रदेशभर के 500 से अधिक तहसीलदार, नायब तहसीलदार और अन्य राजस्व अधिकारी हड़ताल पर रहे। अंबिकापुर में कनिष्ठ राजस्व अधिकारी संघ के बैनर तले सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की गई।संघ ने सरगुजा आईजी को ज्ञापन सौंपकर स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि आरोपियों की गिरफ्तारी जल्द नहीं हुई तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन रूप दिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि यदि प्रशासनिक अधिकारियों के साथ इस तरह की घटनाओं पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में सरकारी कामकाज प्रभावित होगा।

कांग्रेस का हमला: “सरेंडर नहीं, सियासी प्रदर्शन

मामले में पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने भाजपा विधायक पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति पर अपराध दर्ज है और उसे आत्मसमर्पण करना है तो वह सीधे थाने जाकर सरेंडर करता है, न कि आईजी कार्यालय तक रैली निकालकर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश करता है। भगत ने कहा कि प्रदेश में सुशासन के दावों के बीच यह पूरा घटनाक्रम एक राजनीतिक प्रदर्शन जैसा दिखाई देता है। उन्होंने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आरोपी खुलेआम शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि कार्रवाई अब तक अधूरी है।

प्रमाणपत्र विवाद से शुरू हुआ पूरा मामला

विवाद की जड़ एक शोध क्षमता प्रमाणपत्र को लेकर बताई जा रही है। राजापुर के नायब तहसीलदार तुषार मानिक का कहना है कि उनसे एक ऐसे आवेदन पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया जा रहा था जो नियमों के अनुरूप नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक की बहन द्वारा लगातार दबाव बनाया गया, लेकिन दस्तावेज अधूरे होने के कारण प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जा सकता था।कनिष्ठ राजस्व अधिकारी संघ के प्रांताध्यक्ष कृष्ण कुमार लहरे के अनुसार, संबंधित आवेदन लगभग 25 लाख रुपए के शोध प्रमाणपत्र से जुड़ा था, जबकि तहसीलदार के अधिकार क्षेत्र की अपनी सीमाएं हैं। उनका कहना है कि नियमों को दरकिनार कर दबाव बनाने की कोशिश की गई, जिसका विरोध करने पर विवाद की स्थिति बनी।

अब आगे क्या?

सरगुजा की यह घटना अब केवल एक मारपीट प्रकरण नहीं रह गई है। इसमें प्रशासनिक सम्मान, राजनीतिक प्रतिष्ठा और कानून व्यवस्था तीनों सवालों के घेरे में हैं। विधायक गिरफ्तारी देने की बात दोहरा रहे हैं, राजस्व अधिकारी आंदोलन तेज करने की चेतावनी दे रहे हैं और विपक्ष सरकार पर निशाना साध रहा है। ऐसे में सबकी नजर अब पुलिस और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Himansh sharma

Related News