शक्ति से समृद्धि की ओर नारी - मुख्यमंत्री डॉ. यादव का महिला सशक्तिकरण का सफल मॉडल
Tuesday, Mar 24, 2026-07:53 PM (IST)
भोपाल: भारत में महिला सशक्तिकरण को लेकर लंबे समय से नीतियां और कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह स्पष्ट हुआ है कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है उनका प्रभावी क्रियान्वयन और नवाचार ही वास्तविक परिवर्तन लाता है। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण को इसी दृष्टिकोण से आगे बढ़ाया जा रहा है। राज्य सरकार का मंतव्य महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं बल्कि विकास प्रक्रिया की सक्रिय भागीदार बनाना है। मध्यप्रदेश ने महिलाओं को आर्थिक, तकनीकी और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कई अभिनव प्रयास किये गये हैं, जिनका असर अब जमीनी स्तर पर स्पष्ट दिखाई देने लगा है।
महिला स्व-सहायता समूहों को मजबूत बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में है। मध्यप्रदेश में लाखों महिलाएं स्व-सहायता समूहों के माध्यम से छोटे उद्यम, कृषि आधारित गतिविधियों और सेवा क्षेत्र से जुड़ रही हैं। आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाज़ार से जोड़ने की व्यवस्था की गई है। इन प्रयासों का परिणाम यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं अब केवल घरेलू कार्यों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही हैं। अनेक महिलाएं डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और अन्य सूक्ष्म उद्योगों के साथ-साथ स्टार्ट-अप्स माध्यम से अपनी आय बढ़ा रही हैं।
महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने तकनीकी नवाचारों को भी अपनाया है। ‘ड्रोन सखी’ जैसा नवाचार इसका उदाहरण हैं। इस पहल के अंतर्गत ग्रामीण महिलाओं को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वे कृषि क्षेत्र में उर्वरक और कीटनाशक के छिड़काव जैसी सेवाएँ प्रदान कर आजीविका अर्जित करने में सक्षम बनें। यह पहल महिलाओं के लिए आय के नए अवसर तो दिला रही है, साथ ही आधुनिक तकनीक को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इससे यह संदेश भी जाता है कि नई तकनीक के क्षेत्र में महिलाएँ पीछे नहीं हैं, बल्कि वे अग्रणी भूमिका निभा सकती हैं।
महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण को सुदृढ़ बनाने के लिए राज्य सरकार ने आंगनवाड़ी व्यवस्था को मजबूत किया है। डिजिटल तकनीक के माध्यम से पोषण की निगरानी, गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच और बच्चों के विकास की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जा रही है। प्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्रों को केवल पोषण वितरण केंद्र के रूप में नहीं बल्कि प्रारंभिक शिक्षा और समग्र बाल विकास के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
किसी भी समाज के विकास में महिलाओं की शिक्षा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने बालिकाओं की शिक्षा को प्राथमिकता दी है। प्रारंभिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक बालिकाओं के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में कई प्रयास किए जा रहे हैं। आंगनवाड़ी केंद्रों में प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करने की पहल भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे बालिकाओं की शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित होती है और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
महिलाओं को विकास प्रक्रिया का नेतृत्वकर्ता बनाने के लिए उन्हें स्थानीय निकायों, पंचायतों और विभिन्न समितियों में अधिक भागीदारी दी जा रही है। इससे महिलाओं की नीति निर्माण और प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ रही है और समाज के विकास से जुड़े मुद्दों पर उनका दृष्टिकोण भी सामने आ रहा है।
मध्यप्रदेश में महिला सशक्तिकरण की पहल केवल सामाजिक न्याय तक सीमित नहीं है, बल्कि इन्हें राज्य के समग्र विकास की रणनीति का हिस्सा बनाया गया है। आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से न केवल परिवारों की आय में वृद्धि होती है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मजबूत होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में महिला सशक्तिकरण की जो पहल की जा रही हैं, यह दर्शाती हैं कि जब महिलाओं को अवसर, संसाधन और विश्वास मिलता है तो वे समाज और अर्थव्यवस्था दोनों को नई दिशा दे सकती हैं। आज मध्यप्रदेश महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक ऐसे मॉडल के रूप में उभर रहा है, जहां महिलाएं केवल विकास की सहभागी नहीं बल्कि परिवर्तन की प्रमुख वाहक बन रही हैं।

