SDM को लेकर वकीलों और पटवारियों में टकराव! प्रशासन की बढ़ी मुश्किलें, जानें पूरा मामला
Saturday, Sep 12, 2026-01:49 PM (IST)
भिण्ड : मध्य प्रदेश के भिण्ड जिले के लहार अनुभाग के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व महेंद्र सौजन्या को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पटवारी और अधिवक्ताओं के बीच टकराव में बदल गया है। पटवारी संघ ने उप जिलाधिकारी (एसडीएम) पर अभद्र व्यवहार और अपमानित करने के आरोप लगाकर जांच की मांग की थी। इसके बाद लहार बार एसोसिएशन अध्यक्ष विकास बिरथरे के नेतृत्व में कुछ अधिवक्ता एसडीएम के समर्थन में सामने आए। उन्होंने पटवारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए भ्रष्टाचार के अलावा कई आरोप लगाए। पटवारी संघ ने वकीलों के ज्ञापन पर आपत्ति जताते हुए निंदा प्रस्ताव पारित किया है। संघ ने आरोप लगाया कि यह ज्ञापन एसडीएम के इशारे पर दिया गया है। अब दोनों पक्षों के आमने-सामने आने के बाद प्रशासन की जांच पर नजर है।
राज्य के भिण्ड जिले में लहार उपखंड मजिस्ट्रेट (एसडीएम) महेंद्र सौजन्य पर पटवारियों के साथ कथित तौर पर अमर्यादित व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगा है। इस घटना के विरोध में मध्य प्रदेश पटवारी संघ ने शुक्रवार को जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कारर्वाई की मांग की है। इसके बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच कराने का निर्णय लिया था। इसी के बाद कल लहार बार एसोसिएशन अध्यक्ष विकास बिरथरे तीन-चार अधिवक्ताओं के साथ एसडीएम कार्यालय पहुंचे। उन्होंने एसडीएम को ईमानदार बताते हुए पटवारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि पटवारी धारा 115 की जानकारी नहीं देते, छोटे-बड़े कामों में भ्रष्टाचार करते हैं और अपने हलकों में उपलब्ध नहीं रहते। उनका कहना था कि पटवारियों के नहीं मिलने से किसानों को अपने काम के लिए परेशान होना पड़ता है।
वकीलों ने पटवारियों की ओर से एसडीएम पर लगाए गए आरोपों को भी निराधार बताया। अधिवक्ताओं ने इस संबंध में एसडीएम कार्यालय की लिपिक को ज्ञापन सौंपा। अधिवक्ताओं के ज्ञापन के बाद पटवारी संघ ने भी निंदा प्रस्ताव पारित किया। संघ ने आरोप लगाया कि बार एसोसिएशन का ज्ञापन एसडीएम के इशारे पर तैयार कराया गया और चुनिंदा अधिवक्ताओं ने निजी स्वार्थ के चलते पटवारियों के खिलाफ यह कदम उठाया। पटवारी संघ ने वकीलों के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि जिस घटना को लेकर एसडीएम पर आरोप लगाए गए हैं, उस समय मौके पर कोई अधिवक्ता मौजूद नहीं था। संघ का कहना है कि घटना की वास्तविकता जांच के तथ्यों से ही सामने आनी चाहिए। मामले में एक पक्ष एसडीएम के व्यवहार की जांच की मांग कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष उनके समर्थन में पटवारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब प्रशासन की जांच से ही स्थिति साफ होने की उम्मीद है।

