सिंहस्थ के लिए CM मोहन यादव ने पेश की मिसाल, अपने ही पैतृक घर पर विधि-विधान से पूजन के बाद खुद चलाई गेती
Sunday, Sep 27, 2026-11:42 AM (IST)
उज्जैन। सिंहस्थ 2028 को लेकर उज्जैन में विकास और अधोसंरचना से जुड़े काम तेज हो गए हैं। शहर में श्रद्धालुओं की संभावित भारी भीड़ को देखते हुए सड़कें चौड़ी की जा रही हैं और कई इलाकों में निर्माण कार्यों के लिए जरूरी जगह उपलब्ध कराई जा रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के परिवार से जुड़ा पैतृक मकान भी सड़क चौड़ीकरण की जद में आया है। खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं उज्जैन के अब्दालपुरा क्षेत्र पहुंचे। यहां सड़क चौड़ीकरण के तहत उनके पैतृक मकान के हिस्से को हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई। कार्रवाई से पहले विधि-विधान से पूजन किया गया और इसके बाद मुख्यमंत्री ने खुद अपने हाथों से मकान के हिस्से पर गेती चलाकर उसे हटाने की शुरुआत की।
यह मकान मुख्यमंत्री के लिए केवल एक इमारत नहीं, बल्कि उनके बचपन और शुरुआती राजनीतिक जीवन की यादों से जुड़ा रहा है। बताया जाता है कि उनके दादा रामचंद्र यादव ने वर्ष 1974 में इस मकान का निर्माण कराया था। मुख्यमंत्री का बचपन इसी घर में बीता। इसी दौर में उन्होंने सार्वजनिक जीवन में अपनी शुरुआती पहचान बनाई और कॉलेज अध्यक्ष के रूप में उनका राजनीतिक सफर आगे बढ़ा।

सड़क चौड़ीकरण में परिवार के मकान का हिस्सा भी शामिल
सिंहस्थ की तैयारियों के तहत खजूर वाली मस्जिद से गणेश चौक तक सड़क को चौड़ा करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इस परियोजना में मुख्यमंत्री के पैतृक मकान का करीब 2.90 मीटर हिस्सा प्रभावित हो रहा है। वहीं उनकी बहन और उज्जैन नगर निगम की सभापति कलावती यादव के मकान का लगभग 3.8 मीटर हिस्सा भी सड़क चौड़ीकरण के दायरे में आया है। मुख्यमंत्री के मकान के सामने स्थित मनकामेश्वर महादेव मंदिर का कुछ हिस्सा भी प्रस्तावित चौड़ीकरण की सीमा में शामिल है। स्थानीय स्तर पर सड़क विस्तार के लिए कई मकानों और अन्य संरचनाओं को पीछे किया जा रहा है।
करीब 270 मकान और संरचनाएं आ रही हैं दायरे में
अब्दालपुरा क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण की इस कार्रवाई का दायरा काफी बड़ा है। जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री के मोहल्ले में ही करीब 270 मकान और अन्य संरचनाएं इस परियोजना से प्रभावित हो रही हैं। प्रशासन का उद्देश्य सिंहस्थ के दौरान उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं के आवागमन को अधिक सुगम बनाना और शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर करना है।
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर उज्जैनवासियों के सहयोग को विकास कार्यों की महत्वपूर्ण ताकत बताया। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ की तैयारियों और शहर के विकास के लिए लोगों ने स्वेच्छा से अपने मकान पीछे किए हैं। उनके मुताबिक यह जनसहयोग और सामाजिक समरसता का उदाहरण है।
'उज्जैन की आबादी 8 लाख, जिम्मेदारी करोड़ों श्रद्धालुओं की'
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन की आबादी लगभग 8 लाख है, लेकिन सिंहस्थ के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन की व्यवस्था की जिम्मेदारी शहर पर होगी। ऐसे बड़े आयोजन के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां जरूरी हैं और इसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जा रहा है और सभी के हितों को ध्यान में रखकर काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और पारसी समुदाय समेत अलग-अलग वर्गों के लोगों ने विकास कार्यों में सहयोग किया है। उन्होंने यह भी कहा कि कई लोगों ने अपने धार्मिक स्थलों से जुड़े हिस्सों को भी विकास के लिए पीछे किया है।
अपने ही बचपन के घर पर मुख्यमंत्री द्वारा गेती चलाने की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में है। इस कदम के जरिए सिंहस्थ की तैयारियों के बीच विकास कार्यों के लिए व्यक्तिगत स्तर पर सहयोग का संदेश भी सामने आया है।

