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बड़ी जिम्मेदारी की तैयारी में कांग्रेस, जीतू पटवारी को मिल सकता है अहम मौका

Sunday, May 24, 2026-06:37 PM (IST)

भोपाल। निर्वाचन आयोग द्वारा राज्यसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद देशभर की राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। 12 राज्यों की 26 राज्यसभा सीटों पर 18 जून को मतदान होना तय हुआ है। इनमें मध्यप्रदेश की तीन अहम सीटें भी शामिल हैं, जिन पर अब राजनीतिक दलों ने रणनीति तेज कर दी है।

मध्यप्रदेश से राज्यसभा के तीन मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है। इनमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह, तथा भाजपा के केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन और डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी शामिल हैं। इन सीटों को लेकर अब राजनीतिक समीकरण नए मोड़ पर पहुंच गए हैं।

कांग्रेस में दावेदारी और अंदरूनी संतुलन की चुनौती

इस बार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने चुनाव मैदान में उतरने से इनकार कर दिया है। ऐसे में उनकी संभावित सीट के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का नाम प्रमुख दावेदारों में उभरकर सामने आ रहा है। हालांकि, कांग्रेस के लिए यह राह आसान नहीं दिख रही है। विधानसभा में संख्याबल कमजोर होने और कुछ विधायकों की अनिश्चित स्थिति ने पार्टी की रणनीति को जटिल बना दिया है।

विधायकों की स्थिति से बिगड़ सकता है गणित

राजनीतिक समीकरणों को और पेचीदा बनाते हुए दतिया विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त हो चुकी है। वहीं विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा राज्यसभा चुनाव में मतदान से वंचित रहेंगे। इसके अलावा बीना विधायक निर्मला सप्रे की स्थिति भी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में यह तय करना फिलहाल कठिन है कि वे किस दल के पक्ष में मतदान करेंगी।

निर्णायक मोड़ पर मध्यप्रदेश की राजनीति

इन हालातों में राज्यसभा चुनाव मध्यप्रदेश की राजनीति के लिए केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं रह गया है, बल्कि यह शक्ति संतुलन और संगठनात्मक एकजुटता की परीक्षा बन गया है। कांग्रेस के लिए यह चुनाव अपने विधायकों को एकजुट रखने की चुनौती है, वहीं भाजपा अपने मौजूदा संख्याबल के दम पर बढ़त बनाए रखने की कोशिश में है। 18 जून का मतदान केवल सीटों का फैसला नहीं करेगा, बल्कि आने वाले समय की राजनीतिक दिशा भी तय कर सकता है।


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Content Editor

Himansh sharma

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