मीनाक्षी नटराजन के समर्थन में उतरे कांग्रेस के बड़े नेता, बोले- यह अब देश और लोकतंत्र बचाने की लड़ाई है
Friday, Jun 12, 2026-11:01 AM (IST)
भोपाल। मध्यप्रदेश राज्यसभा चुनाव से जुड़ा मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने का मामला अब प्रदेश की सीमाओं से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला बताते हुए भाजपा और चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने खुलकर मीनाक्षी नटराजन के समर्थन में मोर्चा संभाल लिया है, जबकि मामला अब सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक पहुंच चुका है। कांग्रेस के मध्यप्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने गुरुवार को दिल्ली में तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह लड़ाई अब केवल राज्यसभा चुनाव या कांग्रेस पार्टी तक सीमित नहीं रही, बल्कि देश और लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई बन चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों की व्याख्या सत्ता के दबाव में की जा रही है और निष्पक्षता के सिद्धांतों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
उधर कांग्रेस की वरिष्ठ नेता रजनी पाटिल ने भी इस फैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि जिस तरह मीनाक्षी नटराजन को निशाना बनाया गया है, उससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। पाटिल ने कहा कि पूरा कांग्रेस परिवार नटराजन के साथ खड़ा है और इस कार्रवाई की निंदा करता है। इस बीच कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने अपने नामांकन पत्र को निरस्त किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला गैर-कानूनी, मनमाना और पक्षपातपूर्ण है। उन्होंने न्यायालय से तत्काल हस्तक्षेप कर निर्णय को निरस्त करने की मांग की।
सिंघवी का तर्क है कि जिस आपराधिक मामले का हवाला देकर नामांकन रद्द किया गया, उसमें अभी केवल समन जारी हुआ था और अदालत द्वारा संज्ञान तक नहीं लिया गया था। ऐसे में इसे नामांकन खारिज करने का आधार बनाना कानून और न्याय दोनों की भावना के विपरीत है।
सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को इस मामले पर प्रारंभिक सुनवाई हुई, जहां इसे अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए शीघ्र सुनवाई की मांग की गई। अदालत ने मामले को शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध कर दिया है। अब सभी की निगाहें सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर टिकी हैं, क्योंकि इसका असर केवल एक उम्मीदवार के राजनीतिक भविष्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी पड़ेगा।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह विवाद आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ सकता है। कांग्रेस इसे लोकतंत्र और संविधान से जुड़ा मुद्दा बताकर राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी में है, जबकि भाजपा और चुनाव आयोग की ओर से अब तक लगाए गए आरोपों पर औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। ऐसे में शुक्रवार की सुनवाई इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम की दिशा तय करने वाली साबित हो सकती है।

