जहर खाने वाले आरक्षक पीयूष मिश्रा की मौत, सदमे में परिजन, पुलिस विभाग में पसरा मातम
Saturday, Oct 24, 2026-04:54 PM (IST)
रीवा (गोविंद सिंह) : रीवा पुलिस विभाग से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। शहर के विश्वविद्यालय थाने में पदस्थ आरक्षक पीयूष मिश्रा का उपचार के दौरान निधन हो गया। बताया जा रहा है कि उन्होंने कुछ दिन पहले पारिवारिक विवाद के चलते कीटनाशक का सेवन कर लिया था। इसके बाद से उनका उपचार चल रहा था, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर से पुलिस महकमे सहित उन्हें जानने वाले लोगों में शोक की लहर दौड़ गई है।
पीयूष मिश्रा सिर्फ वर्दी पहनकर ड्यूटी करने वाले एक पुलिसकर्मी नहीं थे, बल्कि अपनी तेज कार्यशैली, सक्रियता और मददगार स्वभाव के कारण लोगों के बीच एक अलग पहचान रखते थे। शहर से लेकर जिले तक पुलिस विभाग में उन्हें जानने वाले लोगों की कमी नहीं थी। अपराधियों की धरपकड़ में उनकी सक्रियता और सूचनाओं पर तेजी से काम करने की क्षमता उन्हें दूसरे पुलिसकर्मियों से अलग बनाती थी।

बड़े-बड़े अपराधियों को पकड़ने में थी महारत
आरक्षक पीयूष मिश्रा की पहचान एक ऐसे पुलिसकर्मी के रूप में थी, जो अपराधियों तक पहुंचने और उन्हें पकड़ने में अपनी पूरी ताकत लगा देते थे। उनकी कार्यशैली तेज थी और अपराधियों के नेटवर्क तक पहुंचने की क्षमता के चलते उन्होंने कई मामलों में अहम भूमिका निभाई। पुलिस विभाग में उनकी सक्रियता की चर्चा होती थी। जिस थाने में भी उनकी पदस्थापना रही, वहां उन्होंने अपनी मेहनत और काम करने के तरीके से लोगों का विश्वास हासिल किया।
दोस्तों के लिए भाई से बढ़कर थे पीयूष
ड्यूटी के दौरान सख्त और सक्रिय रहने वाले पीयूष मिश्रा निजी जीवन में अपने दोस्तों और परिचितों के लिए मददगार माने जाते थे। बताया जाता है कि वह अपने दोस्तों को भाई से भी बढ़कर मानते थे और जरूरत पड़ने पर उनकी मदद के लिए आगे रहते थे। यही वजह है कि उनके निधन की खबर पर कई लोगों को यकीन नहीं हो रहा कि जो साथी कल तक उनके बीच था, वह अब इस दुनिया में नहीं रहा।
उनके साथ काम करने वाले पुलिसकर्मियों और परिचितों के लिए यह क्षति केवल एक साथी को खोने तक सीमित नहीं है, बल्कि उस इंसान को खोने का दर्द है, जिसके साथ काम की यादें, दोस्ती और अपनापन जुड़ा हुआ था।

कई सवाल छोड़ गया असमय निधन
पीयूष मिश्रा के असमय निधन ने उनके परिचितों को गहरे सदमे में डाल दिया है। एक सक्रिय पुलिसकर्मी, जो अपराधियों से मुकाबला करने और लोगों की मदद करने के लिए जाना जाता था, उसका इस तरह दुनिया से चले जाना सभी को व्यथित कर रहा है। हालांकि, उनके इस कदम के पीछे की वास्तविक वजह को लेकर बिना आधिकारिक जानकारी के कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। आज पीयूष मिश्रा भले ही अपने साथियों और परिचितों के बीच मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनके साथ बिताए पल, उनकी कार्यशैली और मददगार स्वभाव की यादें हमेशा लोगों के दिलों में रहेंगी।
एक साथी चला गया, यादें छोड़ गया।
रीवा पुलिस के इस जवान को जानने वाले लोगों की आंखें नम हैं। हर कोई यही सोच रहा है कि कल तक साथ खड़ा रहने वाला साथी आज अचानक हमेशा के लिए दूर हो गया। आरक्षक पीयूष मिश्रा का असमय निधन उनके परिवार, मित्रों और पुलिस विभाग के लिए अपूरणीय क्षति है।

