लॉटरी सिस्टम से नगरपालिका अध्यक्ष बनी BJP प्रत्याशी के चयन को कांग्रेस प्रत्याशी ने हाईकोर्ट में दी चुनौती, आया ये फैसला
Monday, Apr 13, 2026-03:29 PM (IST)
(बैकुंठपुर): साल 2021 में बैकुंठपुर नगरपालिका अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर हाईकोर्ट (High Court) ने अपना फैसला सुना दिया है, हाईकोर्ट ने जिला एवं सत्र न्यायालय के निर्णय को बरकरार रखते हुए साधना जायसवाल की अपील को निरस्त कर दिया है और बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में ही फैसले को रखा है।
दरअसल 2021 में हुए चुनाव में भाजपा और कांग्रेस की महिला उम्मीदवारों को समान वोट मिले थे। नगर पालिका बैकुंठपुर के चुनाव में दोनों उम्मीदवारों को समान मत प्राप्त हुए थे। फिर लॉटरी सिस्टम से नगरपालिका अध्यक्ष को चुना गया था। दोनों उम्मीदवारों के अलावा सभी पार्षदों की सहमति से लॉटरी सिस्टम से नपाध्यक्ष का चयन किया गया। लाटरी सिस्टम में भाजपा की नविता शैलेष शिवहरे विजयी हुई थीं।
लेकिन हारी हुई उम्मीदवार ने फैसले के खिलाफ जिला न्यायालय में याचिका पेश की लेकिन मई 2025 को जिला न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद साधना जायसवाल ने हाईकोर्ट का रुख किया था। मामले में 10 अप्रैल को फैसला सुनाते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (High Court) ने भी अपील को खारिज कर दिया।
आपको बता दें कि बैकुंठपुर की नगरपालिका परिषद का चुनाव दिसंबर 2021 को हुआ था, चुनाव अधिकारी ने विजयी पार्षदों की मौजूदगी में 1 जनवरी 2022 को नपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव कराया। नपाध्यक्ष पद के लिए भाजपा की ओर से नविता शिवहरे और कांग्रेस की ओर से साधना जायसवाल के बीच मुकाबला था।
दोनों को समान मत मिले थे, जिस पर दोनों प्रत्याशियों और पार्षदों की सहमति से लॉटरी सिस्टम से फैसला करने का निर्णय लिया गया। इसमें भाजपा की नविता शैलेश शिवहरे को नपाध्यक्ष को चुना गया था। इस पूरी प्रक्रिया में पूर्ण सहमति देने, हस्ताक्षर करने के बाद भी पराजित साधना जायसवाल ने जिला न्यायालय बैकुंठपुर में चुनाव के खिलाफ याचिका प्रस्तुत की थी।
करीब 3 वर्षों तक न्यायालय में सभी प्रकार के साक्ष्यों की जांच कराई गई , प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने 7 मई 2025 को साधना जायसवाल की चुनाव याचिका खारिज कर दी। जिला न्यायालय में हारने के बाद साधना जायसवाल के वकील ने उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ में अपील प्रस्तुत की। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद 23 फरवरी 2026 को निर्णय सुरक्षित रखा था और 10 अप्रैल को हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय के निर्णय को ही बरकरार रखा।

