क्या नरोत्तम मिश्रा को मिलने वाली है बड़ी जिम्मेदारी? दिग्गजों की मुलाकात से अटकलें तेज
Wednesday, Sep 02, 2026-06:12 PM (IST)
भोपाल : मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा एक बार फिर सक्रिय नजर आ रहे हैं। दतिया उपचुनाव में हार के बाद उनके राजनीतिक भविष्य पर खतरा मंडरा रहा था, सियासी फिजाओं में चर्चाएं थी कि भीतरघात के आरोपों की वजह से उन्हें राजनीति से दूर रखा जाएगा। लेकिन हाल ही में ओरछा से सामने आई तस्वीर से राजनीतिक हवाओं ने मानों रुख बदल लिया हो। इसके बाद आए दिन भाजपा नेताओं से उनकी मुलाकातों की तस्वीरें सामने आ रही है। हाल ही में मंत्री कुंवर विजय शाह ने उनसे मुलाकात की है। इससे पहले कैलाश विजयवर्गीय और भाजपा के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री ने उनसे मुलाकात की है।

दतिया में भाजपा जिला कार्यकारिणी और जिलाध्यक्ष की नियुक्ति होनी बाकी है। ऐसे में कयास लगाए जाने लगे हैं कि जल्द ही नरोत्तम मिश्रा को भाजपा फिर से कोई अहम जिम्मेदारी सौंप सकती है। सूत्रों की मानें तो नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक भविष्य को लेकर भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेता उनके पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक भूमिका को लेकर भोपाल से लेकर दिल्ली तक मंथन जारी है। जल्द ही इस विषय पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

दिग्गजों की मुलाकात से बढ़ी सियासी हलचल
ओरछा में बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ऐतिहासिक जहांगीर महल का दौरा किया। इस दौरान नरोत्तम मिश्रा भी मुख्यमंत्री के साथ मौजूद रहे। खास बात ये रही कि इस दौरान नरोत्तम मिश्रा के साथ बीजेपी के राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिव प्रकाश और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी नजर आए।

वहीं बीते दिन भाजपा के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल का नरोत्तम मिश्रा के आवास पर पहुंचना सियासी तौर पर अहम माना जा रहा है। जामवाल के अलावा प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी मिश्रा से मुलाकात की। दोनों नेताओं की मुलाकात अलग-अलग समय पर हुई। वहीं भोपाल स्थित निवास पर मध्यप्रदेश शासन के जनजातीय कार्य विभाग कैबिनेट मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह भी नरोत्तम मिश्रा से मिलने पहुंचे। इस अवसर पर पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया।

बता दें कि दतिया उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा टिकट के प्रबल दावेदार मानें जा रहे थे, लेकिन भाजपा ने आशुतोष तिवारी को टिकट देकर सबको चौंका दिया था। जिस वजह से उनके समर्थकों में नाराजगी खुलकर सामने आई थी और भाजपा कार्यालय के घेराव तक की स्थिति बन गई थी। इस दौरान स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई थी और दतिया में भाजपा दो फाड़ होती नजर आई थी। जिसकी प्रदेशभर में चर्चा रही। इसी पूरे घटनाक्रम में नरोत्तम मिश्रा की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे थे। मामला यहीं शांत नहीं हुआ था इसके बाद दतिया में भाजपा की हार के लिए भीतरघात की आशंका जताई गई और कहीं न कहीं नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों को ही जिम्मेदार माना गया। हालांकि कुछ ही समय में नरोत्तम मिश्रा ने पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी स्थिति और दतिया चुनाव से जुड़े घटनाक्रम पर अपना पक्ष रखा और सारी स्थिति से अवगत कराया। अब लगातार दिग्गजों से मुलाकातों ने सियासी फिजाओं को गरमा दिया है। कयास लगाए जाने लगे हैं कि भाजपा लंबे समय से सक्रिय रहे वरिष्ठ नेता की भूमिका को लेकर फैसला ले सकती है।

