Punjab Kesari MP ads

दतिया : भाजपा में फिर सियासी घमासान! पार्षदों ने नपा अध्यक्ष के खिलाफ खोला मोर्चा, नरोत्तम समर्थक होने पर गर्माई सियासत!

Wednesday, Sep 02, 2026-05:24 PM (IST)

दतिया (राघवेन्द्र यादव) : दतिया नगर पालिका परिषद एक बार फिर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के चलते विवादों के घेरे में आ गई है। पार्षदों ने नगर पालिका अध्यक्ष और उनके बेटे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इसके साथ ही नरोत्तम समर्थकों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। पार्षदों ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली, वित्तीय अनियमितताओं और अव्यवस्थाओं को लेकर जमकर हल्ला बोला। पार्षदों द्वारा उठाए गए मुद्दों के बाद शहर के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

सोमवार को नगर पालिका सभा कक्ष में पत्रकार वार्ता में पार्षद ब्रजेश यादव सबसे मुखर रहे। उन्होंने सीधे तौर पर नगर पालिका अध्यक्ष शांति प्रशांत ढेंगुला के कार्यकाल पर निशाना साधा। यादव ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि नगर पालिका अध्यक्ष के पुत्र द्वारा अपनी मां के फर्जी हस्ताक्षर कर लगभग 35 करोड़ 75 लाख रुपये के फर्जी भुगतान कराए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि यह जानकारी नगर पालिका परिषद की अकाउंट शाखा में पदस्थ एक कर्मचारी से उन्हें मिली है।

पार्षदों ने कहा कि नगर पालिका में बाहरी लोगों का अनाधिकृत हस्तक्षेप बढ़ गया है और अवैध वसूली की जा रही है। पेयजल संकट के नाम पर किए गए खर्च और जनरेटरों की खरीदी व उपयोगिता पर भी सवाल खड़े किए गए।

विकास कार्यों को लेकर भी पार्षदों ने गंभीर आरोप लगाए। कहा कि विकास के नाम पर सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं। स्ट्रीट लाइट घोटाले का जिक्र करते हुए बताया कि एक करोड़ रुपये की लागत से लाइटें व अन्य सामग्री खरीदी गई, इसके बावजूद शहर के अधिकांश वार्डों में अंधेरा पसरा रहता है।

इसी तरह 27 करोड़ रुपये की लागत वाली नाला योजना का काम भी चार साल बाद भी अधूरा पड़ा है। उल्लेखनीय है कि यह राशि तत्कालीन गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की पहल पर शहर को जलभराव से मुक्ति दिलाने के लिए एसडीआरएफ योजना के तहत स्वीकृत हुई थी। सीता सागर साफ सफाई के नाम पर लाखों का गमन सहित नगरपालिका में फैले भ्रष्टाचार के तमाम मुद्दों को उठाया गया।

पत्रकार वार्ता के अंत में एक संवेदनशील मुद्दा भी उठाया गया। पार्षदों ने बताया कि सहायक राजस्व निरीक्षक रहे स्व. अरुण उदैनिया के निधन के लंबे समय बाद भी उनके परिजन को अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी गई है। आरोप है कि अनुकंपा नियुक्ति के एवज में परिजनों से पैसों की मांग की जा रही है।

अंत में सभी पार्षदों ने एक स्वर में नगर पालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की। चेतावनी दी कि यदि शीघ्र जांच नहीं कराई गई तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

meena

Related News