तथ्यों की बलि चढ़ाती सनसनीखेज रिपोर्टिंग: जबलपुर क्रूज हादसे में बंगाल में ड्यूटी कर रहे अधिकारी को घसीटा
Sunday, May 03, 2026-01:13 PM (IST)
भोपाल/जबलपुर (इज़हार हसन ख़ान): पत्रकारिता में तथ्यों की पुष्टि सबसे बुनियादी शर्त होती है, लेकिन जबलपुर क्रूज हादसे को लेकर हाल ही में जो रिपोर्टिंग देखने को मिल रही है, उसने 'तथ्य' और 'तर्क' दोनों को हाशिए पर धकेल दिया है।कुछ लोगो द्वारा इस हादसे को पर्यटन विभाग के एमडी और आईएएस अधिकारी दिलीप यादव से जोड़कर भ्रामक दावे किए जा रहे हैं।
हजारों किलोमीटर दूर ड्यूटी, फिर भी 'जिम्मेदार'
हैरानी की बात यह है कि जिस समय इस हादसे की जिम्मेदारी दिलीप यादव पर मढ़ी जा रही है, उस समय वे मध्य प्रदेश में मौजूद भी नहीं हैं। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, दिलीप यादव मार्च से चुनाव पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में पश्चिम बंगाल में तैनात हैं। जब कोई अधिकारी राज्य से बाहर केंद्रीय चुनाव आयोग की ड्यूटी पर हो, तब उसे स्थानीय स्तर पर हुए हादसे के लिए जवाबदेह ठहराना प्रशासनिक समझ और निष्पक्ष पत्रकारिता, दोनों पर सवाल खड़े करता है।
सियासी रंग देने की कोशिश
इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब मध्य प्रदेश कांग्रेस ने इस भ्रामक खबर को लपकते हुए इसे मुख्यमंत्री मोहन यादव और दिलीप यादव के बीच का 'कनेक्शन' बताकर प्रचारित करना शुरू कर दिया। एक प्रशासनिक दुर्घटना को बिना किसी जांच या आधार के सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय और एक अनुपस्थित अधिकारी से जोड़ना, केवल राजनीतिक रोटियां सेंकने का प्रयास नजर आता है।
जवाबदेही पर उठे सवाल
मीडिया के एक वर्ग द्वारा की जा रही इस "शूट एंड स्कूट" (आरोप लगाओ और भागो) वाली पत्रकारिता ने प्रशासनिक हलकों में भी नाराजगी पैदा की है। जानकारों का मानना है कि किसी भी हादसे की गंभीरता को समझने के बजाय, उसे सनसनी बनाकर किसी का भी नाम घसीट लेना अब एक नया ट्रेंड बनता जा रहा है, जो लोकतांत्रिक स्तंभों के लिए घातक है।

