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बीजेपी संगठन में अंदरूनी हलचल तेज! नई कार्यसमिति से कई बड़े चेहरों की छुट्टी तय? क्षेत्र और गुटबाजी के बीच फंसा संगठन

Thursday, May 07, 2026-05:42 PM (IST)

भोपाल: मध्य प्रदेश की सियासत इन दिनों फिर संगठनात्मक हलचलों के केंद्र में है। भारतीय जनता पार्टी की नई प्रदेश कार्यसमिति को लेकर राजधानी से लेकर जिलों तक गहन मंथन जारी है। पार्टी ने भले ही कार्यसमिति की पहली बैठक के लिए धार्मिक नगरी ओरछा को तय कर लिया हो, लेकिन असली चुनौती अब उस सूची को अंतिम रूप देने की है, जिसमें जगह पाने की उम्मीद लगाए बैठे नेताओं की लंबी कतार खड़ी है। इस बार संगठन केवल नामों की घोषणा नहीं करने जा रहा, बल्कि एक ऐसा राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश में है, जो आने वाले वर्षों की सत्ता और संगठन दोनों की दिशा तय करेगा। सूत्र बताते हैं कि प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल इस बार कार्यसमिति का आकार सीमित रखने के पक्ष में हैं। पार्टी संविधान के तहत करीब 106 सदस्यों तक समिति को सीमित करने की तैयारी है, जबकि विशेष आमंत्रित सदस्यों की संख्या भी नियंत्रित रखने पर मंथन चल रहा है। यह फैसला इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश कार्यसमिति का आकार लगातार बढ़ता गया था। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के कार्यकाल में कार्यसमिति, स्थायी आमंत्रित और विशेष आमंत्रित सदस्यों को मिलाकर संख्या 463 तक पहुंच गई थी। अब पार्टी नेतृत्व इसे संगठनात्मक बोझ मानते हुए छोटी लेकिन अधिक सक्रिय टीम बनाना चाहता है।

लेकिन यही फैसला अब बीजेपी नेतृत्व के लिए सबसे बड़ी परीक्षा भी बन गया है। प्रदेश में 62 संगठनात्मक जिले हैं और हर जिले की अपनी राजनीतिक अपेक्षाएं हैं। ऐसे में सीमित सीटों के भीतर क्षेत्रीय संतुलन, जातीय समीकरण, वरिष्ठ नेताओं की भूमिका, नए चेहरों की एंट्री और महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना आसान नहीं माना जा रहा। संगठन के भीतर कई नेता अपनी सक्रियता और पुराने योगदान के आधार पर जगह की उम्मीद लगाए बैठे हैं, जबकि युवा चेहरों और नए सामाजिक समीकरणों को भी साधना पार्टी की मजबूरी बन गया है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह केवल कार्यसमिति गठन नहीं, बल्कि बीजेपी के भीतर भविष्य की शक्ति संरचना तय करने की प्रक्रिया है। प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व, शिवराज सिंह चौहान की राजनीतिक स्वीकार्यता और ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक नेताओं की सक्रियता के बीच संगठन को ऐसा संतुलन बनाना है, जिससे किसी गुट में असंतोष खुलकर सामने न आए। यही वजह है कि भोपाल में संगठनात्मक बैठकों और बंद कमरों की चर्चाओं का दौर लगातार जारी है।

विपक्ष ने भी बीजेपी की इस कवायद को लेकर हमला तेज कर दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी अंदरूनी गुटबाजी से जूझ रही है और कार्यसमिति गठन में हो रही देरी उसी का परिणाम है। हालांकि बीजेपी इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रही है। पार्टी नेताओं का दावा है कि बीजेपी एक कैडर आधारित संगठन है और हर स्तर पर संतुलन के साथ निर्णय लिए जाते हैं। बीजेपी का कहना है कि नई कार्यसमिति में महिलाओं और सभी क्षेत्रों को सम्मानजनक प्रतिनिधित्व मिलेगा।

इस पूरी राजनीतिक कवायद के बीच सबसे ज्यादा चर्चा उस पहली बैठक को लेकर है, जो नई कार्यसमिति के गठन के बाद ओरछा में राम राजा सरकार के दरबार में आयोजित होगी। बीजेपी इसे केवल संगठनात्मक बैठक नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश के रूप में भी देख रही है। पार्टी इस आयोजन के जरिए कार्यकर्ताओं के बीच अनुशासन, एकजुटता और वैचारिक मजबूती का संदेश देना चाहती है।फिलहाल प्रदेश बीजेपी के गलियारों में सिर्फ एक सवाल सबसे ज्यादा गूंज रहा है—नई सूची में किसे जगह मिलेगी और कौन इंतजार करता रह जाएगा। क्योंकि इस बार छोटी कार्यसमिति में शामिल होना केवल पद नहीं, बल्कि शीर्ष नेतृत्व के भरोसे की मुहर माना जाएगा।


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Content Editor

Himansh sharma

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