MP कांग्रेस में घमासान! 8 नेताओं के इस्तीफे से हड़कंप, आशीष अग्रवाल बोले- संगठन नहीं, अंतर्कलह हावी
Wednesday, Jul 01, 2026-04:51 PM (IST)
भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस एक बार फिर अपनी अंदरूनी कलह को लेकर सुर्खियों में है। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आए घटनाक्रमों ने यह संकेत दिया है कि संगठन के भीतर असंतोष लगातार गहराता जा रहा है। कहीं संगठनात्मक बैठकों में कार्यकर्ता आमने-सामने नजर आए तो कहीं नई नियुक्तियों से नाराज नेताओं ने पद छोड़ दिए। इन घटनाओं ने विपक्ष को कांग्रेस पर हमला बोलने का अवसर भी दे दिया है। भोपाल में आयोजित यूथ कांग्रेस की संगठनात्मक बैठक के दौरान उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब कुछ कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस हाथापाई तक पहुंच गई। स्थिति बिगड़ती देख प्रदेशाध्यक्ष यश घंगोरिया को स्वयं हस्तक्षेप कर मामला शांत कराना पड़ा। संगठन की अहम बैठक में हुए इस घटनाक्रम ने पार्टी की आंतरिक स्थिति पर कई सवाल खड़े कर दिए।
उधर ग्वालियर में शहर जिला कांग्रेस की नई कार्यकारिणी घोषित होते ही विरोध के स्वर तेज हो गए। लंबे समय से संगठन में सक्रिय कई वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया कि अनुभव और वरिष्ठता की अनदेखी कर पसंदीदा चेहरों को प्राथमिकता दी गई है। सूची जारी होने के कुछ ही घंटों में कई पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। बढ़ते विरोध को देखते हुए प्रदेश नेतृत्व को नई कार्यकारिणी की सूची पर फिलहाल रोक लगाने का निर्णय लेना पड़ा।
नाराज नेताओं का कहना है कि वर्षों से संगठन को मजबूत करने वाले कार्यकर्ताओं को अपेक्षित सम्मान नहीं मिला। कुछ नेताओं का दावा है कि पहले जिन पदों पर वे जिम्मेदारी निभा चुके थे, नई सूची में उन्हें अपेक्षाकृत छोटे दायित्व दिए गए, जिसे उन्होंने अपनी राजनीतिक गरिमा के विपरीत माना।
इधर सीधी जिले में भी कांग्रेस की बैठक विवादों में आ गई। बैठक समाप्त होने के बाद सोशल मीडिया पर की गई एक पुरानी राजनीतिक टिप्पणी को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि विधानसभा प्रभारी विनोद शर्मा के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की स्थिति बन गई। पार्टी नेतृत्व ने घटना को गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए संबंधित दो नेताओं के खिलाफ निष्कासन की कार्रवाई कर दी।
इन घटनाओं के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर बैठक का वीडियो साझा करते हुए कांग्रेस की संगठनात्मक स्थिति पर सवाल उठाए और कहा कि जो दल अपनी आंतरिक व्यवस्था नहीं संभाल पा रहा, वह प्रदेश की जिम्मेदारी कैसे निभाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मध्यप्रदेश कांग्रेस के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती संगठन को एकजुट बनाए रखने की है। यदि नियुक्तियों और गुटबाजी से जुड़े विवादों का समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले राजनीतिक कार्यक्रमों और चुनावी तैयारियों पर इसका असर पड़ सकता है। फिलहाल पार्टी नेतृत्व हालात को सामान्य करने की कोशिश में जुटा है, लेकिन लगातार सामने आ रहे घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि संगठन के भीतर असंतोष अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है।

