MP में काम नहीं करने वाले पंचायत सचिवों की जाएगी कुर्सी? 3698 काम अटकने पर सरकार सख्त
Wednesday, Oct 21, 2026-04:15 PM (IST)
भोपाल। मध्यप्रदेश में ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों में देरी अब पंचायत सचिवों के लिए मुश्किलें बढ़ा सकती है। गांवों में स्वीकृत निर्माण कार्य समय पर पूरे नहीं होने और विभिन्न योजनाओं की प्रगति धीमी रहने से सरकार ने जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्ती करने के संकेत दिए हैं। कामकाज की समीक्षा के बाद लापरवाही सामने आने पर पंचायत सचिवों को पद से हटाने और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है।
राजधानी भोपाल जिले की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की स्थिति ने प्रशासन का ध्यान खींचा है। यहां 42 ग्राम पंचायतों में करीब 3,698 काम तय समय के मुताबिक पूरे नहीं हो सके हैं। इनमें पंचायत भवन, सामुदायिक भवन, आंतरिक सड़कों, नालियों और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े निर्माण कार्य शामिल हैं। इन परियोजनाओं में देरी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की रफ्तार प्रभावित हो रही है।
पंचायत सचिवों के कामकाज की होगी समीक्षा
लंबे समय से अटके कार्यों को पूरा कराने के लिए प्रशासन अब पंचायत स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। संबंधित पंचायत सचिवों के कामकाज की समीक्षा कर यह पता लगाया जाएगा कि निर्माण कार्यों में देरी किन कारणों से हुई है। यदि जांच में जानबूझकर लापरवाही, कर्तव्य में उदासीनता या अन्य गंभीर अनियमितताएं सामने आती हैं, तो संबंधित सचिवों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार का जोर इस बात पर है कि स्वीकृत योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक समय पर पहुंचे और विकास कार्य केवल कागजों तक सीमित न रहें। पंचायतों में उपलब्ध सरकारी राशि का उचित इस्तेमाल हो तथा निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरे किए जाएं, इसके लिए जवाबदेही तय करने की तैयारी है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव पहले ही दे चुके हैं चेतावनी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पंचायत सचिवों की जिम्मेदारी को लेकर पहले भी सख्त रुख जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने भोपाल में आयोजित सरपंच महासम्मेलन के दौरान स्पष्ट किया था कि अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं करने वाले और कामकाज में लापरवाही बरतने वाले पंचायत सचिवों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री का संदेश था कि ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों में ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अब पंचायतों में लंबित कामों की समीक्षा के बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की संभावनाएं बढ़ गई हैं। हालांकि, किसी सचिव को हटाने से पहले संबंधित मामले की जांच और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा।
पंचायतों में शिकायतें भी बनीं परेशानी की वजह
भोपाल जिले की कुछ ग्राम पंचायतों में कामकाज को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आ चुकी हैं। अगरिया पंचायत में छह अक्टूबर को सरपंच और ग्रामीणों ने सचिव के खिलाफ धरना दिया था। प्रदर्शनकारियों ने सचिव हेम सिंह राजपूत पर पंचायत कार्यालय नहीं खोलने का आरोप लगाया था।
इसके अलावा जिला पंचायत की बैठक में जलापूर्ति से जुड़े कार्यों में देरी को लेकर अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों ने नाराजगी जताई थी। हबीबगंज, पिपलिया हसनाबाद, गोंदीपुरा और सेमरीकला जैयी पंचायतों से संबंधित शिकायतों पर पहले नोटिस जारी किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इन मामलों से स्पष्ट है कि पंचायतों में विकास कार्यों की निगरानी और जिम्मेदार कर्मचारियों की जवाबदेही प्रशासन के लिए अहम मुद्दा बन गई है।
पंचायत राज अधिनियम के तहत हो सकती है कार्रवाई
लापरवाही और गंभीर शिकायतों वाले मामलों में मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। खबर में उल्लेखित धारा 40 के तहत संबंधित प्रकरणों में नियमानुसार कार्रवाई की संभावना जताई गई है। हालांकि, सचिवों के विरुद्ध कौन-सी कार्रवाई लागू होगी, यह मामले के तथ्यों, संबंधित पद की कानूनी स्थिति और सक्षम प्राधिकारी की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
फिलहाल सरकार और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती लंबित विकास कार्यों को गति देना है। भोपाल जिले में सामने आए 3,698 अधूरे कार्यों की स्थिति ने पंचायत व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। अब यह देखना अहम होगा कि समीक्षा के बाद कितने मामलों में जिम्मेदारी तय होती है और अटके हुए कामों को पूरा कराने के लिए प्रशासन क्या कदम उठाता है।

