PM किसान निधि से डेढ़ लाख से ज्यादा किसानों के कटे नाम! इन किसानों के खाते में नहीं आएंगे 12 हजार रुपए
Monday, Feb 16, 2026-12:48 PM (IST)
भोपाल : मध्य प्रदेश के किसानों के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। किसानों को मिलने वाली पीएम किसान निधि योजना से प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख से ज्यादा किसान बाहर हो गए हैं। दरअसल, हाल ही में राज्यसभा में प्रस्तुत सरकारी आंकड़ों से इस बात का खुलासा हुआ है। इसके बाद प्रदेश की राजनीति और किसानों के बीच नई चर्चा छिड़ गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में मध्य प्रदेश के 1.66 लाख से अधिक किसान योजना की लाभार्थी सूची से बाहर हो गए हैं। यह संख्या न केवल किसानों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि इससे राज्य को मिलने वाली केंद्रीय सहायता पर भी असर पड़ा है। योजना से बाहर हुए किसानों के कारण प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के जरिए मिलने वाली रकम में कमी दर्ज की गई है।
क्या है योजना
फरवरी 2019 में केंद्र की मोदी सरकार ने किसानों को आर्थिक संबल देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत पात्र किसानों को सालाना 6 हजार रुपए तीन बराबर किश्तों में दिए जाते हैं। उस समय मध्य प्रदेश में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त 6 हजार रुपए देने की घोषणा की थी। इस तरह प्रदेश के किसानों को सालाना कुल 12 हजार रुपए की सहायता मिलने लगी।
विपक्ष का आरोप, सरकार का जवाब
इस मुद्दे पर कांग्रेस विधायक सुजीत सिंह चौधरी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि धीरे-धीरे किसानों को योजना से बाहर किया जा रहा है। उनके मुताबिक अब तक 1.66 लाख किसान सूची से हटाए जा चुके हैं और जो राशि मिलती भी है, वह ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ के समान है।
वहीं प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि योजना से किसी पात्र किसान को बाहर नहीं किया गया है। उन्होंने दावा किया कि जिन नामों को हटाया गया है, वे तकनीकी या पात्रता से जुड़े कारणों के चलते हटे होंगे।
पीएम किसान योजना: किन किसानों को नहीं मिलेगा लाभ, क्यों घटी राशि?
मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या में आई कमी के पीछे कई तकनीकी और प्रशासनिक कारण सामने आए हैं। आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में किसानों की किश्तें फिलहाल रुकी हुई हैं, जिससे न केवल परिवारों पर असर पड़ा है बल्कि राज्य को मिलने वाली कुल राशि में भी कमी आई है।
ई-केवाईसी लंबित: 74 हजार किसानों की किश्त अटकी
योजना के तहत ई-केवाईसी अनिवार्य किए जाने के बाद कई किसानों की प्रक्रिया अधूरी रह गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश के 74,271 किसानों की किश्तें सिर्फ इसलिए अटकी हुई हैं क्योंकि उनका ई-केवाईसी सत्यापन पूरा नहीं हुआ है। जैसे ही ये किसान आधार लिंकिंग और बायोमेट्रिक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करेंगे, उनकी रुकी हुई राशि फिर से जारी हो सकती है। प्रशासन का कहना है कि यह स्थायी बहिष्कार नहीं, बल्कि तकनीकी अनुपालन का मामला है।
बजट में 93 करोड़ से अधिक की कमी
लाभार्थियों की संख्या घटने का सीधा असर राज्य को मिलने वाली आर्थिक सहायता पर पड़ा है।
- 2022 में: प्रति किश्त लगभग 1,730.12 करोड़ वितरित किए गए।
- 2025 में: प्रति किश्त लगभग 1,636.35 करोड़ वितरित किए गए।
इस तरह प्रति किश्त करीब 93.77 करोड़ की कमी दर्ज की गई है। यह अंतर दर्शाता है कि हजारों किसानों के नाम सूची से हटने या भुगतान रुकने से राज्य के कृषि क्षेत्र में प्रत्यक्ष नकद प्रवाह कम हुआ है।
तकनीकी कारण या पात्रता जांच?
विशेषज्ञ मानते हैं कि ई-केवाईसी, भूमि रिकॉर्ड सत्यापन, डुप्लीकेट एंट्री और आयकर दाता की श्रेणी जैसे कारणों से भी कई नाम सूची से हटाए गए हो सकते हैं। हालांकि सरकार का दावा है कि पात्र किसानों को बाहर नहीं किया गया है और जिनकी प्रक्रिया लंबित है, उन्हें दस्तावेज पूरा करते ही लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।
आगे क्या?
ऐसे में जरूरी है कि किसान समय पर ई-केवाईसी और अन्य जरूरी औपचारिकताएं पूरी करें। प्रशासन की ओर से भी शिविर और जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है, ताकि कोई भी पात्र किसान योजना के लाभ से वंचित न रहे और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का उद्देश्य पूरी तरह सफल हो सके।

