गुरु पूर्णिमा पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन, मास्क लगाकर ले रहे गुरु का आशिर्वाद

7/5/2020 1:11:55 PM

ग्वालियर: गुरु पूर्णिमा के मौके पर हर कोई अपने गुरु की पूजा कर रहा है। भारतीय शास्त्रों में गुरु का स्थान भगवान से पहले माना गया है क्योंकि ईश्वर प्राप्ति के लिए गुरु ही मार्ग दिखाते हैं। मान्यता है कि जो व्यक्ति आज के दिन अपने गुरु के दर्शन कर आशिर्वाद प्राप्त करता है उसका पूरा साल शुभ होता है। इस बार गुरु पूर्णिमा जुलाई माह की 5 तारीख रविवार को पड़ रही है।

 

क्यों है गुरु पूर्णिमा का पर्व खास

गुरु पूर्णिमा के पर्व पर हम सब अपने गुरुओं और बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं। गुरु पूर्णिमा पर गुरु का पूजन करने की परंपरा लबें समय से चली आ रही है। आज महर्षि वेद व्सास की जयंती भी है। और उनके सम्मान में  इस पर्व को मनाया जाता है। महर्षि वेद व्यास चारों वेदों, 18 पुराणों, महाभारत के रचयिता और कई अन्य ग्रंथों के रचनाकार का भी है। इन्होनें ही वेदों का विभाजन किया था, जिसके बाद इनका नाम वेद व्यास पड़ा। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरुओं की पूजा और उनका सम्मान करते हुए उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया जाता हैं।

 

गरुपूर्णिमा पर नियमों का पालन  

गुरुपूर्णिमा के दिन अपने गुरु के दर्शन करना शुभ माना जाता है। लेकिन इस बार कोरोना महामारी के चलते मंदिर भी सूने हैं, और सार्वजनिक कार्यक्रमों पर रोक है। हर साल ग्वालियर में जहां हजारों श्रद्धालु हर साल मुरैना करह आश्रम में स्थित पटिया वाले बाबा का आशीर्वाद लेने जाते थे। लेकिन इस बार कोरोनावायरस के चलते इस बार गुरु का आशीर्वाद लेने लोग टुकड़ों में पहुंच रहे हैं। सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क लगाकर अपने आध्यात्मिक गुरु का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि पूर्णिमा के दिन अपने आध्यात्मिक गुरु के दर्शन और उनका ध्यान करने से साल भर मनुष्य को शुभ कार्य में सफलता हासिल होती है। इसलिए गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व बताया गया है।


Vikas kumar

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