MP में पद्मश्री कैलाश चंद्र पंत का 90 वर्ष की आयु में निधन, मोहन यादव समेत दिग्गज नेताओं ने जताया शोक
Friday, Jul 31, 2026-06:04 PM (IST)
भोपालः प्रसिद्ध साहित्यकार और 'पद्मश्री' से सम्मानित कैलाश चंद्र पंत का शुक्रवार को यहां 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। पंत बीते कुछ समय से अस्वस्थ थे और शुक्रवार सुबह हृदयगति रुक जाने से उनका निधन हो गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कैलाश चंद्र पंत के निधन पर शोक जताया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
सुप्रसिद्ध साहित्यकार, पद्मश्री श्रद्धेय कैलाशचंद्र पंत जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) July 31, 2026
मध्यप्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति में श्री पंत जी लंबे समय तक सक्रिय रहे, उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
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मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 'एक्स' पर लिखा, "मध्यप्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति में पंत जी लंबे समय तक सक्रिय रहे। उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिजनों को असीम दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।" मूल रूप से उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के खंतोली गांव निवासी पंत का जन्म 26 अप्रैल 1936 को इंदौर के महू में हुआ था। उनके पिता लीलाधर पंत तथा माता हरिप्रिया पंत का परिवार रोजगार के सिलसिले में मध्यप्रदेश में बस गया था।
मध्य प्रदेश के प्रख्यात साहित्यकार, वरिष्ठ पत्रकार व पद्मश्री से अलंकृत श्री कैलाश चन्द्र पंत जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। हिन्दी भाषा, साहित्य तथा पत्रकारिता के संवर्धन में उनका आजीवन योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
— Hemant Khandelwal (@Hkhandelwal1964) July 31, 2026
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने… pic.twitter.com/sOkpJCaVNJ
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी पंत के निधन पर दुख व्यक्त किया है। खंडेलवाल ने 'एक्स' पर लिखा, "मध्य प्रदेश के जाने-माने साहित्यकार, सीनियर पत्रकार और पद्म श्री अवार्डी श्री कैलाश चंद्र पंत जी के निधन की खबर सुनकर बहुत दुख हुआ। हिंदी भाषा, साहित्य और पत्रकारिता को बेहतर बनाने में उनका जीवन भर का योगदान हमेशा याद रहेगा। मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि वे दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें और दुखी परिवार, प्रियजनों और उनके अनगिनत चाहने वालों को यह बहुत बड़ा दुख सहने की शक्ति दें। ओम शांति।"
बता दें कि कैलाश चंद्र पंत ने इंदौर स्थित 'यूनियन थियोलाजिकल सेमिनरी' में व्याख्याता के रूप में सेवाएं दीं और फिर भोपाल में पंचायत राज प्रशिक्षण केंद्र के प्राचार्य के रूप में काम किया। वह 'शिक्षा प्रदीप', 'जनधर्म', 'दूरगामी आह्वान' जैसी साहित्यिक पत्रिकाओं के संपादक भी रहे। हिंदी भवन, भोपाल में संचालक रहे पंत ने भारत कृषक समाज, राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति सहित अनेक संस्थाओं में महत्वपूर्ण दायित्व निभाया। उनकी प्रमुख पुस्तकों में 'कौन किसका आदमी', 'धुंध के आर-पार', 'शब्द का विचार-पथ' तथा 'शैलेश मटियानी: सृजन यात्रा' शामिल हैं। हिंदी साहित्य में योगदान के लिए उन्हें इसी साल पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। इससे पहले उन्हें साहित्य भूषण सम्मान, निराला साहित्य सम्मान, साहित्य शिरोमणि सम्मान, संस्कृति गौरव सम्मान सहित अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

