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पटवारी ने 4 दिन में मिले 3 नोटिस के बाद लगाई फांसी, बड़े अधिकारी पर प्रताड़ना के आरोप से मचा हड़कंप

Thursday, Apr 23, 2026-01:53 PM (IST)

रतलाम। मध्यप्रदेश के रतलाम जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 21 अप्रैल को पटवारी रविशंकर खराड़ी ने अपने ही घर में फांसी लगाकर जान दे दी। हैरानी की बात यह है कि इससे ठीक एक दिन पहले वे अपने छोटे भाई की शादी में जमकर नाचते-गाते और खुश नजर आए थे।जानकारी के अनुसार, रविशंकर खराड़ी खजूरी सोलंकी के हल्का नंबर 34 में पदस्थ थे। शादी 20 अप्रैल को हुई थी और बारात राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के तारवाखाटी तक गई थी। परिवार के मुताबिक, रविशंकर बारात में साफा पहनकर पूरे उत्साह के साथ शामिल हुए थे और काफी खुश दिखाई दे रहे थे। लेकिन शादी के अगले ही दिन हालात अचानक बदल गए। परिजनों के अनुसार, बारात से लौटने के बाद वे सीधे अपने कमरे में चले गए और फिर बाहर नहीं आए।

सुबह सामान्य बातचीत, दोपहर में सनसनी

परिजनों ने बताया कि 21 अप्रैल की सुबह रविशंकर सामान्य दिख रहे थे। उन्होंने चाय-नाश्ते को लेकर बातचीत भी की थी, लेकिन दोपहर बाद दरवाजा नहीं खोला। जब परिजनों ने दरवाजा तोड़ा तो वे फंदे पर लटके मिले। उन्हें तुरंत मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

सुसाइड नोट और गंभीर आरोप

पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसे रविशंकर ने पटवारी संघ के एक पदाधिकारी को व्हाट्सऐप भी किया था। नोट में उन्होंने नायब तहसीलदार सविता राठौर पर गंभीर आरोप लगाए हैं।सुसाइड नोट में लिखा है कि उन पर लगातार काम का दबाव बनाया जा रहा था, और मौका रिपोर्ट, पंचनामा, बटांकन व फर्द में अनावश्यक बदलाव के लिए मजबूर किया जा रहा था। साथ ही, छोटे भाई की शादी के दौरान भी उन्हें छुट्टी नहीं दी गई। उन्होंने यह भी लिखा कि उन्हें बार-बार क्वार्टर पर बुलाकर दबाव डाला गया और गलत कार्य कराने की कोशिश की गई, जिसकी रिकॉर्डिंग मौजूद होने का भी दावा किया गया है।

4 दिन में 3 नोटिस का आरोप

मामले में यह भी सामने आया है कि रविशंकर को मात्र चार दिनों में तीन कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे, जिससे वह मानसिक दबाव में थे।

प्रशासन की कार्रवाई

घटना के बाद कलेक्टर मिशा सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नायब तहसीलदार सविता राठौर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

जांच जारी

पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। सुसाइड नोट, मोबाइल चैट और कथित रिकॉर्डिंग को भी जांच के दायरे में लिया गया है। यह मामला अब प्रशासनिक दबाव और कार्यस्थल की परिस्थितियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।


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Content Editor

Himansh sharma

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