98.72 करोड़ की जलप्रदाय योजना पर सवाल: खुले चैंबर में गिरी सरपंच की कार, निर्माण कंपनी पर लापरवाही के आरोप
Monday, Oct 12, 2026-12:32 PM (IST)
रायसेन (शिलाल यादव): जल जीवन मिशन के तहत 98.72 करोड़ रुपए की लागत से बनाई जा रही हलाली समूह जलप्रदाय योजना की जमीनी हकीकत सवालों के घेरे में है। योजना के जरिए भोपाल जिले के 36 और रायसेन जिले के 25 गांवों तक पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था। काम वर्ष 2025 तक पूरा करने का दावा किया गया, लेकिन अक्टूबर 2026 में भी कई गांवों में नियमित जलापूर्ति नहीं होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। कहीं पाइपलाइन में लीकेज से सड़कें जलमग्न हो रही हैं, तो कहीं खुले चैंबर हादसों को न्योता दे रहे हैं।
ताजा मामला नरखेड़ा गांव का है, जहां सरपंच रामदयाल लोधी ने निर्माण कंपनी पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सड़क किनारे बनाए गए बड़े चैंबरों को खुला छोड़ दिया गया है। बीते दिनों उनकी कार खुले चैंबर में गिर गई, जिससे वाहन को नुकसान पहुंचा। सरपंच के मुताबिक, इस संबंध में कई बार शिकायत की गई, लेकिन इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।

कम गहराई में पाइपलाइन, वाहनों से हो रही क्षतिग्रस्त
ग्रामीणों का आरोप है कि पाइपलाइन निर्धारित गहराई पर नहीं बिछाई गई है। इसके कारण वाहनों की आवाजाही से पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो रही है और जगह-जगह पानी का रिसाव हो रहा है। लीकेज के कारण सड़क पर पानी फैल रहा है, वहीं ग्रामीणों को भी नियमित पेयजल आपूर्ति का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में योजना के निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
करोड़ों खर्च, फिर भी ग्रामीणों को राहत का इंतजार
हलाली समूह जलप्रदाय योजना का उद्देश्य 61 गांवों तक पेयजल पहुंचाना है, ताकि ग्रामीणों को घरों तक पानी मिल सके। लेकिन नरखेड़ा में सामने आई समस्याओं ने योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब करोड़ों रुपए की लागत से योजना तैयार की जा रही है, तो निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों और गुणवत्ता का ध्यान क्यों नहीं रखा जा रहा?

जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब?
अब सवाल यह है कि खुले चैंबरों को सुरक्षित करने, पाइपलाइन के लीकेज ठीक कराने और जलापूर्ति सुचारू करने के लिए जिम्मेदार विभाग कब कदम उठाएगा। क्या निर्माण कंपनी के काम की गुणवत्ता की जांच होगी और लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी? ग्रामीणों को इंतजार है कि कागजों पर तय समयसीमा और दावों से आगे बढ़कर योजना का लाभ वास्तव में उनके घरों तक पहुंचे।

