कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पर टिकट बेचने के आरोप! पुलिस में शिकायत, बिजावर विधानसभा टिकट को लेकर छिड़ा सियासी विवाद
Thursday, May 07, 2026-09:14 PM (IST)
छतरपुर (राजेश चौरसिया) : छतरपुर जिले की बिजावर विधानसभा से कांग्रेस पार्टी की टिकट दिलाने के नाम पर लाखों रुपए की कथित ठगी का मामला सामने आने के बाद जिले की राजनीति गरमा गई है। महोबा निवासी डॉ. अरुण यादव ने कांग्रेस से जुड़े वरिष्ठ नेता एवं इंद्रा ज्योति अभियान के संरक्षक भास्कर राव रोकड़े पर 6 लाख रुपए लेने का आरोप लगाते हुए सिविल लाइन थाना छतरपुर में शिकायत दर्ज कराई है। वहीं भास्कर राव रोकड़े ने आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

शिकायतकर्ता डॉ. अरुण यादव पिता ब्रजपाल सिंह यादव निवासी गांधी नगर महोबा (उत्तर प्रदेश) के अनुसार वर्ष 2022 में उनके पास एक फोन कॉल आया था। कॉल करने वाले ने खुद को कांग्रेस का वरिष्ठ रणनीतिकार बताते हुए कहा कि वह कमलनाथ और जीतू पटवारी जैसे नेताओं के करीबी हैं तथा कांग्रेस पार्टी बिजावर विधानसभा सीट से उन्हें चुनाव लड़ाना चाहती है।
डॉ. अरूण यादव का आरोप है कि इसके बाद भोपाल स्थित डेनिश कुंज कॉलोनी में मुलाकात हुई, जहां चुनावी तैयारी और पार्टी फंड के नाम पर रकम मांगी गई। शिकायत के मुताबिक अक्टूबर 2022 में होटल ओम साई राम, स्टेशन रोड छतरपुर में 3 लाख रुपए नगद और 1 लाख रुपए का एसबीआई चेक दिया गया। इसके बाद फरवरी 2023 में 2 लाख रुपए और दिए गए।

डॉ. यादव का कहना है कि विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर उन्हें लोकसभा चुनाव में मौका देने का आश्वासन दिया गया, लेकिन बाद में टिकट भी नहीं मिला और रुपए वापस मांगने पर कथित रूप से धमकी दी गई। उन्होंने दावा किया कि इस मामले की शिकायत कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं तक भी पहुंचाई गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

इधर गुरुवार को कांग्रेस कार्यालय में आयोजित “चलें रामराज्य की ओर” अभियान की प्रेस वार्ता में भास्कर राव रोकड़े ने आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि उनके खिलाफ साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि वे दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, लेकिन मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
कांग्रेस जिला अध्यक्ष गगन यादव ने भी पूरे मामले को षड्यंत्र बताते हुए कहा कि सच सामने आना चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। फिलहाल मामला पुलिस जांच में है और अब सभी की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

