गुरुजी पर ज़मीन का डबल गेम! 32 डिसमिल खेत के सौदे में 3 लाख की वसूली, रजिस्ट्री टली…जमीन किसी और के नाम
Tuesday, Mar 24, 2026-07:30 PM (IST)
बोरी (हेमंत पाल) : बच्चों को नैतिकता और ईमानदारी का पाठ पढ़ाने वाले एक सरकारी शिक्षक पर अब खुद बेईमानी के गंभीर आरोप लगे हैं। मामला छोटा दिखता है सिर्फ 32 डिसमिल (0.32 हेक्टेयर) कृषि भूमि का लेकिन कहानी में ऐसे मोड़ हैं कि गांव से लेकर तहसील तक हलचल मची है। आरोप है कि तीन लाख रुपये लेने के बाद भी जमीन की रजिस्ट्री नहीं कराई गई, उल्टा उसी जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी किसी अन्य व्यक्ति को देकर रजिस्ट्री करा दी गई।
सौदा पक्का, भुगतान पूरा… रजिस्ट्री गायब
भिलाई निवासी दीपक मदान ने शिकायत में बताया कि सितंबर 2024 में ग्राम अरसी निवासी दीपक देशलहरे से खसरा नंबर 1051 और 1086 की कुल 0.32 हेक्टेयर कृषि भूमि का सौदा तीन लाख रुपये में तय हुआ। जिसमें 50 हजार रुपये ऑनलाइन और 1 लाख रुपये नकद भुगतान भी चरणबद्ध तरीके से किया गया। 1.50 लाख रुपये चेक के माध्यम से रकम मिलने के बाद आरोपी ने कागजी त्रुटि का हवाला देते हुए समय मांगा और पावर ऑफ अटॉर्नी देने का आश्वासन दिया। शिकायतकर्ता इंतजार करता रहा, लेकिन रजिस्ट्री की तारीख आगे खिसकती रही।
खुलासा तब हुआ जब…
जब शिकायतकर्ता खुद रजिस्ट्री कराने पहुंचा तो सच्चाई ने चौंका दिया जिस जमीन के लिए तीन लाख रुपये दिए गए थे, उसकी पावर ऑफ अटॉर्नी पहले ही किसी अन्य व्यक्ति को देकर रजिस्ट्री कराई जा चुकी थी। तहसील कार्यालय में और भी चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। बताया गया कि इसी जमीन को लेकर कई अन्य लोगों ने भी आपत्ति दर्ज कराई है। इससे यह आशंका गहराई कि कहीं एक ही जमीन के नाम पर एक से अधिक लोगों से रकम तो नहीं ली गई?
पुलिस हर एंगल खंगाल रही
21 मार्च 2026 को चौकी लिटिया सेमरिया में रिपोर्ट दर्ज की गई, जिसके बाद थाना बोरी में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत अपराध क्रमांक 00/2026 पंजीबद्ध किया गया। जांच हेड कांस्टेबल योगेश पचौरी को सौंपी गई है।पुलिस बैंक ट्रांजेक्शन, चेक क्लियरेंस, पावर ऑफ अटॉर्नी दस्तावेज और नामांतरण की प्रक्रिया की बारीकी से जांच कर रही है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आरोपी शिक्षक फिलहाल फरार है, लेकिन तलाश जारी है और शीघ्र गिरफ्तारी की जाएगी।
गांव में चर्चा, सिस्टम पर सवाल
ग्राम अरसी में अब यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। सवाल सिर्फ तीन लाख रुपये का नहीं, बल्कि उस भरोसे का है जो समाज एक शिक्षक पर करता है। क्या यह एक व्यक्ति के साथ धोखाधड़ी है या जमीन के नाम पर बड़ा खेल? क्या पावर ऑफ अटॉर्नी का इस्तेमाल सुनियोजित तरीके से किया गया? और सबसे बड़ा सवाल क्या और भी लोग इस जाल में फंसे हैं? जिस खेत में फसल उगनी थी, वहां अब कानूनी लड़ाई की फसल लहलहा रही है। अब निगाहें पुलिस जांच और आरोपी की गिरफ्तारी पर टिकी हैं।

