मध्य प्रदेश के 70 हजार अतिथि शिक्षकों की नौकरी पर लटकी तलवार, नये निर्देशों से शिक्षकों में मची खलबली

Monday, Feb 23, 2026-05:20 PM (IST)

(भोपाल): मध्य प्रदेश के करीब 70 हजार अतिथि शिक्षक एक फैसले से दिक्कत में आते दिख रहे हैं। इस फैसले के खिलाफ अतिथि शिक्षकों ने मोर्चा खोलने का भी मन बना लिया है। दरअसल लोक शिक्षण संचालनालय ने मध्य प्रदेश के करीब 70 हजार अतिथि शिक्षकों के लिए ऐसे निर्देश जारी किए हैं जो इन शिक्षकों को बिल्कुल भी रास नही आ रहे हैं। नए आदेश के मुताबिक यदि कोई अतिथि शिक्षक लगातार 7  दिन तक ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं करता है, तो उसकी सेवा समाप्त की जा सकती है। इसी निर्देश के चलते अतिथि शिक्षकों की नींद उड़ गई और वो इसे तुगलकी फरमान बता रहे हैं।

लोक शिक्षण संचालनालय के इस आदेश के बाद अतिथि शिक्षकों में आक्रोश देखा जा रहा है। लेकिन तर्क दिया जा रहा है कि  यह व्यवस्था स्कूलों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के मकसद से लागू की गई है।  लेकिन ये व्यवस्था अतिथि शिक्षकों को बिलकुल भी नहीं भा रही है। 7  दिन तक ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं करने पर सेवा समाप्त जैसा निर्देश है ।

क्या हैं ई-अटेंडेंस से जुड़े नियम?

दरअसल  मध्य प्रदेश में जिन शासकीय स्कूलों में स्थायी शिक्षकों की कमी है, वहां पढ़ाई पर कोई प्रभाव नहीं पड़े, इसको ध्यान में रखतक अतिथि शिक्षकों (Guest Teachers) की नियुक्ति की गई है। आपको बता दें कि  इन शिक्षकों को ई-अटेंडेंस (e-attendance) के माध्यम से अपनी हर रोज की मौजूदगी दर्ज करनी होती है, और बड़ी बात है कि वेतन भी इसी आधार पर जारी किया जाता है। लेकि इसी बीच जो इस उपस्थिति को लेकर जानकारी है उसको लेकर ही प्रक्रिया में कुछ नए निर्देश जारी किए हैं।

विभाग का कहना है बड़ी संख्या में शिक्षक गैर हाजिर पाए जाते है और कारण दिया जाता है कि तकनीकी खराबी, नेटवर्क समस्या के चलते ये दिक्कत आती है। बड़ी संख्या में शिक्षकों की अनुपस्थिति को देखते हुए ही सख्ती बढ़ाने का फैसला किया गया है ।

फैसले के खिलाफ आए शिक्षक

वहीं इस आदेश के आते ही अतिथि शिक्षक संगठनों ने विरोध भी शुरू कर दिया है। इसे ‘तुगलकी फरमान’ कहा जा रहा है। तर्क दिया जा रहा है कि  जो शिक्षक जानबूझकर गैरहाजिर रहते हैं, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए लेकिन बीमारी, दुर्घटना में अनुपस्थित रहने वालों के लिए प्रावधान साफ नहीं है। संगठनों की मांग है कि इस आदेश में “कारण बताओ” का प्रावधान जोड़ा जाए, ताकि  जो असली वजहें हैं उन पर काम किया जा सके।


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Content Editor

Desh Raj

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