विधानसभा चुनाव में एमपी के BJP के दो दिग्गज सांसद बुरी तरह हारे, लगा बड़ा झटका
Tuesday, May 05, 2026-12:40 PM (IST)
भोपालः पांच राज्यों के हालिया विधानसभा चुनावों ने भारतीय राजनीति के कई स्थापित समीकरणों को झकझोर दिया है। सत्ता और संगठन की मजबूती के दावों के बीच कुछ ऐसे नतीजे भी सामने आए, जिन्होंने राजनीतिक विश्लेषकों को सोचने पर मजबूर कर दिया। मध्यप्रदेश से राज्यसभा पहुंचने वाले दो केंद्रीय मंत्री डॉ. एल. मुरुगन और जार्ज कुरियन जब सीधे जनता के बीच विधानसभा चुनाव में उतरे, तो उन्हें हार का सामना करना पड़ा। यह परिणाम केवल व्यक्तिगत पराजय नहीं, बल्कि उस राजनीतिक वास्तविकता की ओर संकेत है, जिसमें राज्यसभा की राजनीति और जमीनी जनाधार के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।

दरअसल, तमिलनाडु की अवनाशी सीट से चुनाव लड़ने वाले डॉ. एल. मुरुगन को कमली एस ने 14 हजार से अधिक वोटों से पराजित किया। दिलचस्प यह है कि मुरुगन दूसरे स्थान पर रहे, जो दर्शाता है कि मुकाबला था, लेकिन जनसमर्थन निर्णायक नहीं बन सका। वहीं, केरल की कांजीरापल्ली सीट पर जार्ज कुरियन को कांग्रेस के रॉनी के बेबी ने 29,662 वोटों के बड़े अंतर से हराया। यहां कुरियन तीसरे स्थान पर खिसक गए, जो राजनीतिक रूप से और भी चिंताजनक संकेत देता है। इन दोनों नेताओं की हार कई सवाल खड़े करती है - क्या केंद्रीय पद और राज्यसभा की सदस्यता जमीनी राजनीति में जीत की गारंटी नहीं है? क्या स्थानीय मुद्दों और क्षेत्रीय समीकरणों के सामने राष्ट्रीय पहचान फीकी पड़ जाती है?
वहीं, ध्यान देने वाली बात यह भी है कि डॉ. एल. मुरुगन का राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल 2030 तक सुरक्षित है, जबकि जार्ज कुरियन का कार्यकाल 19 जून को समाप्त होने वाला है। ऐसे में यह हार उनके आगामी राजनीतिक भविष्य पर भी प्रभाव डाल सकती है। स्पष्ट है कि लोकतंत्र में अंतिम निर्णय जनता का ही होता है और यह पद, प्रतिष्ठा या राजनीतिक कद से नहीं, बल्कि स्थानीय जुड़ाव और भरोसे से तय होता है।

