आदिवासियों को लेकर उमंग सिंघार का बड़ा बयान, अलग धर्मकोड को लेकर राष्ट्रपति से करेंगे मांग
Monday, Mar 09, 2026-12:44 PM (IST)
भोपाल (इजहार खान) : मध्य प्रदेश के पवित्र तीर्थ स्थल अमरकंटक से नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आदिवासी समाज को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने आदिवासी समुदाय से अपनी पहचान और अधिकारों के प्रति सजग रहने की अपील की। सिंघार ने कहा कि आज के समय में आदिवासी समाज को एकजुट होकर अपनी परंपराओं, संस्कृति और धार्मिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए आगे आना होगा। यदि समय रहते समाज ने अपनी आवाज़ मजबूत नहीं की, तो आने वाले समय में उनकी मूल पहचान कमजोर पड़ सकती है।
आदिवासी समाज को एकजुट होने का किया आह्वान
उमंग सिंघार ने अपने संबोधन में आदिवासी समाज से एकजुटता दिखाने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश में आदिवासी समुदाय की एक अलग सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा रही है, जिसे पहचान दिलाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है। उन्होंने समाज के युवाओं, बुद्धिजीवियों और सामाजिक संगठनों से आगे आकर जागरूकता फैलाने का आग्रह किया। सिंघार ने कहा कि जब समाज एक मंच पर आकर अपनी मांग रखता है, तभी उसकी आवाज़ शासन और प्रशासन तक मजबूती से पहुंचती है।
समय आ गया है कि हम सभी आदिवासी एकजुट हों। यदि अभी मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के आदिवासी समाज ने अपने अलग धर्म कोड की मांग के लिए अधिक से अधिक आवेदन नहीं भेजे, तो हमारी पहचान को किसी अन्य धर्म की श्रेणी में दर्ज कर दिया जाएगा।
— Umang Singhar (@UmangSinghar) March 9, 2026
मैं अपने सभी आदिवासी भाई-बहनों से आग्रह… pic.twitter.com/W9nP34M4fi
अलग धर्म कोड के लिए अधिक से अधिक आवेदन भेजने की अपील
नेता प्रतिपक्ष ने आदिवासी धर्म के लिए अलग धर्म कोड की मांग को लेकर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इसके लिए अधिक से अधिक लोग आवेदन भेजें ताकि सरकार और राष्ट्रपति तक यह संदेश स्पष्ट रूप से पहुंच सके कि आदिवासी समाज अपनी अलग धार्मिक पहचान चाहता है। सिंघार ने कहा कि फॉर्म भरने और आवेदन भेजने की प्रक्रिया के माध्यम से यह आंदोलन मजबूत होगा और राष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
राष्ट्रपति तक आवाज़ पहुंचाने के लिए फॉर्म भरने की अपील
उमंग सिंघार ने कहा कि आदिवासी समाज की मांग को सर्वोच्च स्तर तक पहुंचाने के लिए संगठित प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में फॉर्म भरकर अपनी मांग राष्ट्रपति तक पहुंचाएं। सिंघार ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समाज समय रहते जागरूक नहीं हुआ, तो भविष्य में आदिवासी पहचान किसी अन्य धर्म के अंतर्गत दर्ज हो सकती है, जिससे उनकी पारंपरिक मान्यताओं और सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंच सकता है।

