MP ब्यूरोक्रेसी में भूचाल: 4 बड़े IAS अधिकारियों पर हो सकती है कार्रवाई
Monday, Apr 06, 2026-05:28 PM (IST)
भोपाल : मध्य प्रदेश में इस समय नौकरशाही के भीतर एक बड़ा विवाद सामने आया है, जिसने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक 1985 बैच के रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी Azad Singh Dabas ने सीधे तौर पर वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। उनका आरोप है कि पर्यावरण नियमों की अनदेखी करते हुए बड़े स्तर पर अवैध अनुमतियां जारी की गईं, जिससे पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।
चार वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों पर गंभीर आरोप
डबास ने जिन अधिकारियों पर आरोप लगाए हैं, उनमें Ashok Varnwal, Navneet Kothari, Shrimant Shukla और Uma Maheshwari R जैसे बड़े नाम शामिल हैं। आरोप है कि इन अधिकारियों ने मिलकर करीब 237 अवैध पर्यावरणीय अनुमतियां जारी कीं।
एनजीटी के आदेशों के बावजूद जारी रही प्रक्रिया
आरोप है कि इस पूरे विवाद में National Green Tribunal पहले ही पन्ना की खदानों से जुड़ी कई अनुमतियों को रद्द कर चुका था। इसके बावजूद विभाग के कुछ वरिष्ठ अधिकारी पुराने फैसलों पर कायम रहे और कथित तौर पर नई अनुमतियां जारी करते रहे। डबास का दावा है कि यह सीधे तौर पर कोर्ट के आदेशों की अवहेलना है, जो प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
कार्रवाई की मांग और सिस्टम पर सवाल
डबास के मुताबिक इस मामले को लेकर पिछले 11 महीनों से मुख्यमंत्री कार्यालय और मुख्य सचिव को लगातार पत्र लिखे जा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि EOW ने जल्द कदम नहीं उठाया, तो वे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। यह मामला अब सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता और कानून के पालन पर एक बड़ी परीक्षा बन गया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या सरकार अपने ही वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

