बारिश में घंटों अंधेरे में डूबे कई गांव! बिजली विभाग की लापरवाही पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
Sunday, Jul 05, 2026-01:37 PM (IST)
धमधा (हेमंत पाल): बरसात का मौसम शुरू होते ही जहां बिजली व्यवस्था को और अधिक मजबूत किए जाने की जरूरत होती है, वहीं धमधा विकासखंड के पश्चिमी क्षेत्र के कई गांवों में विद्युत विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। घोटवानी, धुमा, भाटाकोकड़ी सहित आसपास के कई गांवों में प्रतिदिन रात के समय घंटों बिजली गुल रहने से ग्रामीणों का धैर्य जवाब देने लगा है। लोगों का आरोप है कि विभाग न तो निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर पा रहा है और न ही उपभोक्ताओं को समय पर सही जानकारी दे रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, लगभग हर रात बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली बंद कर दी जाती है। कई बार दो से चार घंटे तक गांव पूरी तरह अंधेरे में डूबे रहते हैं। बरसात के मौसम में यह स्थिति और भी भयावह हो जाती है, क्योंकि सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीव-जंतु घरों और गलियों में निकल आते हैं। अंधेरे के कारण लोगों को हर समय दुर्घटना का डर बना रहता है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली बंद होने के बाद जब संबंधित लाइनमैन या अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की जाती है तो कई बार फोन तक नहीं उठाया जाता। यदि किसी कर्मचारी से संपर्क हो भी जाए तो बिजली बंद होने का कारण या बहाली का समय स्पष्ट नहीं बताया जाता। इससे उपभोक्ताओं में यह भावना बन रही है कि विभाग उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग केवल बिल वसूली में सक्रिय दिखाई देता है, लेकिन उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा देने और शिकायतों के समाधान में लापरवाही बरती जा रही है। हर महीने समय पर बिजली बिल जमा करने के बावजूद लोगों को घंटों बिजली कटौती झेलनी पड़ रही है। उनका कहना है कि यदि रखरखाव या तकनीकी कार्य के कारण बिजली बंद करनी पड़ती है, तो इसकी पूर्व सूचना देना विभाग की जिम्मेदारी है, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा।
बिजली कटौती का असर केवल घरेलू जीवन तक सीमित नहीं है। विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है, किसान अपने जरूरी कार्य समय पर नहीं कर पा रहे हैं और मोबाइल नेटवर्क तथा इंटरनेट सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। लगातार हो रही अघोषित कटौती से लोगों की दिनचर्या पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, अधिकारियों ने फोन उठाना और शिकायतों का समाधान करना शुरू नहीं किया तथा अघोषित बिजली कटौती पर रोक नहीं लगी, तो वे विद्युत विभाग के खिलाफ सामूहिक रूप से आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बरसात जैसे संवेदनशील मौसम में लोगों की सुरक्षा और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, तब आखिर बिजली विभाग की जवाबदेही कौन तय करेगा? और कब तक ग्रामीण अंधेरे, असुविधा और विभागीय उदासीनता का खामियाजा भुगतते रहेंगे?

