दो राज्यों की लालफीताशाही में फंसी विधवा! पति की मौत के दो साल बाद भी नहीं मिला मुआवजा, तीन बच्चों पर संकट
Tuesday, Jul 28, 2026-05:08 PM (IST)
गुना (मिसबाह नूर): सरकारी लाल फीताशाही और दो राज्यों के प्रशासनिक फेर में फंसी एक गरीब विधवा महिला बीते दो साल से न्याय और आर्थिक सहायता के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। राजस्थान के बारां और मध्य प्रदेश के गुना जिला प्रशासन की खींचतान के बीच तीन छोटे बच्चों के पालन-पोषण का संकट खड़ा हो गया है, लेकिन अफसरों को पीड़िता की सुध लेने की फुर्सत नहीं है।
मामला मध्य प्रदेश के गुना जिले की बमोरी तहसील अंतर्गत ग्राम पहाड़ी आकलोन निवासी लाडू देवी का है। उनके पति प्रमोद उर्फ प्रभुलाल परिवार के भरण-पोषण के लिए पड़ोसी राज्य राजस्थान के बारां जिले के शाहबाद में मजदूरी करने गए थे। 17 जुलाई 2024 को बारां जिले के शाहबाद में काम के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से प्रभुलाल की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी।
पति की अचानक मौत के बाद तीन छोटे-छोटे बच्चों की जिम्मेदारी लाडू देवी के कंधों पर आ गई। परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य को खो चुकी लाडू देवी पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और वह गहरे आर्थिक संकट में घिर गई हैं।
आपदा राहत के तहत मिलने वाले मुआवजे के लिए पीड़िता जब राजस्थान के बारां जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंची, तो वहां के अधिकारियों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि आवेदक मध्य प्रदेश की निवासी है, इसलिए मुआवजा गुना कलेक्टर दिलाएंगे।
इसके बाद जब पीड़िता गुना पहुंची, तो गुना कलेक्टर कार्यालय द्वारा नियमानुसार स्पष्ट किया गया कि घटना स्थल बारां राजस्थान है, इसलिए आपदा राहत राशि का भुगतान बारां जिला प्रशासन को ही करना होगा। इस संबंध में गुना कलेक्टर ने बकायदा बारां कलेक्टर को आधिकारिक पत्र लिखकर लाडू देवी को नियमानुसार मुआवजा दिलाने का अनुरोध भी किया है।
प्रशासनिक लापरवाही और सीमा विवाद जैसी स्थिति का दंश झेल रही लाडू देवी पिछले दो साल से गुना, बारां और मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल तक के चक्कर काट चुकी हैं। इसके बावजूद उन्हें आश्वासन के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ है। पीड़ित परिवार ने दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों से गुहार लगाई है कि मानवीय आधार पर हस्तक्षेप कर जल्द से जल्द राहत राशि स्वीकृत कराई जाए।

