इस महिला नेत्री समेत इन बड़े चेहरों को कैबिनेट में एडजस्ट करने की तैयारी! ऐलान कभी भी
Friday, Apr 24, 2026-08:53 PM (IST)
भोपाल : मध्यप्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों की शुरुआत हो चुकी है। लगभग 4-5 आयोग अध्यक्षों की सूची जारी जा चुकी है। ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल को लेकर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की दिल्ली में पार्टी आलाकमान से मुलाकात कर चुके हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही मंत्रिमंडल में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
नए और पुराने चेहरों का संतुलन संभव
राजनीतिक सूत्रों की मानें तो यदि प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार होता है तो इसमें कई वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं को अलग-अलग क्षेत्रों और जिम्मेदारियों में जगह दी जा सकती है। संगठन और सरकार दोनों स्तर पर संतुलन साधने की कोशिश की जा रही है। बताया जा रहा है कि संभावित फेरबदल में कुछ नए चेहरों को मौका देने के साथ-साथ कुछ अनुभवी नेताओं की वापसी भी हो सकती है। 31 सदस्यीय मंत्रीमंडल में 4 पद खाली हैं। इसके अलावा कुछ मौजूदा मंत्रियों को संगठनात्मक जिम्मेदारियां देकर अन्य राज्यों में प्रभारी बनाया जा सकता है, खासकर जहां आगामी चुनाव होने हैं।
सबसे मजबूत दावेदारों की सूची
मंत्रिमंडल में नए चेहरे के तौर पर गोपाल भार्गव सबसे मजबूत दावेदारों में शामिल हैं। वे नौ बार विधायक रह चुके है राजनीतिक अनुभव की वजह से उनके नाम पर मुहर लगना लगभग तय माना जा रहा है। वहीं अटकलें है कि मोहन सरकार कैबिनेट में महिला चेहरे को जगह दे सकती है। जिसमें इंदौर से मालिनी गौड़ का नाम प्रमुखता से शामिल है। वहीं सिंधिया समर्थक खेमे से बृजेंद्र सिंह यादव का नाम भी चर्चा में है। इसके अलावा शैलेंद्र कुमार जैन, प्रदीप लारिया, अर्चना चिटनीस और कमलेश शाह जैसे नाम लगातार राजनीतिक गलियारों में तैर रहे हैं।
दिग्गज मंत्रियों पर संकट के संकेत
सूत्रों के अनुसार इस संभावित फेरबदल में कई वरिष्ठ मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बाहर किया जा सकता है। इनमें कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल, दिलीप अहिरवार और राधा रवींद्र सिंह के नाम प्रमुख रूप से चर्चा में हैं। इन मंत्रियों के भविष्य को लेकर राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं।
विवादों में रहे कुछ मंत्री
हाल के समय में कुछ मंत्रियों के बयान भी चर्चा का विषय बने हैं। खासतौर पर कैलाश विजयवर्गीय अपने बयानों को लेकर विवादों में रहे, जिससे राजनीतिक माहौल गरमाया। इसे भी संभावित फेरबदल की एक वजह के तौर पर देखा जा रहा है।

