रावण की पार्टी में नया ट्विस्ट! अब सामने आए अस्तेय- मैंने संगठन को ख़ून पसीने से सींचा! झूठ फैलाकर मुझे बदनाम करने की साज़िश
Wednesday, Apr 01, 2026-04:22 PM (IST)
भोपाल : आज़ाद समाज पार्टी भीम आर्मी एक पुराने मामले को लेकर अचानक चर्चाओं में आ गई । आरोप है कि 2023 विधानसभा के चुनाव के दौरान आज़ाद समाज पार्टी और भीम आर्मी की भाजपा नेताओं से सौदेबाजी की थी और भाजपा का दामन थाम लिया था। इसमें तत्कालीन पार्टी प्रदेश अध्यक्ष सुनील अस्तेय का नाम भी शामिल है। लेकिन जैसे ही यह मामला सुर्खियों में आया तुरंत सुनील अस्तेय ने इस दावों का खंडन किया और अपना बयान दिया।
मामले में सुनील अस्तेय ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा- मैं, मध्यप्रदेश में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) का फाउंडर मेंबर होने के नाते, इन सभी आरोपों और तथ्यों का पूर्णतः खंडन करता हूं। सारे आरोप भ्रामक, बेबुनियाद और आंबेडकरी मिशन को बदनाम करने की एक सोची-समझी साजिश है। साथ ही यह भी स्पष्ट करना चाहता हूं कि सत्ता एवं विरोधियों के इशारों पर पुराने झूठे मामले को आधार बनाकर षड्यंत्रकारी अफवाह फैलाने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि मैंने अपने खून-पसीने से मध्यप्रदेश में संगठन को खड़ा किया है और बहुजन समाज की आवाज़ को मजबूत करने का काम किया है। ऐसे में मेरे ऊपर इस प्रकार के निराधार आरोप लगाना न केवल मेरी व्यक्तिगत छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास है, बल्कि यह हमारे मिशन और विचारधारा पर भी सीधा हमला है।
आज जब भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की बढ़ती लोकप्रियता और जनसमर्थन से विरोधी घबराए हुए हैं, तब इस तरह की झूठी अफवाहों के जरिए जनता में भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। कुछ बिकाऊ और स्वार्थी तत्वों के माध्यम से हमारे आंदोलन को कमजोर करने की साजिश रची जा रही है, जो कभी सफल नहीं होगी।
उन्होंने आगे कहा कि - मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि बहुजन समाज जागरूक है और वह अच्छी तरह जानता है कि उसका सच्चा साथी और विरोधी कौन है। ऐसी झूठी अफवाहों से न तो हमारा मनोबल टूटेगा और न ही हमारा संघर्ष रुकेगा।

बता दें कि हाल ही में आरोप लगे 2023 विधानसभा के चुनाव के दौरान तत्कालीन पार्टी प्रदेश अध्यक्ष सुनील अस्तेय, भीम आर्मी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील बैरसिया पर आरोप लगा कि उन्होंने तत्कालीन गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा से टिकटों की सौदेबाजी की थी। वर्तमान के प्रदेश प्रभारी विनोद अम्बेडकर का भी नाम उसमें आया था। इन आरोपों के बाद इन सभी को पदों से हटा दिया गया था। दावा है कि इसके बाद धीरे धीरे फिर से उन्हीं लोगों को पद दिए गए हैं।

