Punjab Kesari MP ads

क्या ग्वालियर में अपना प्रभाव खो रहे सिंधिया? काले झंडों के विरोध ने बढ़ाई हलचल, स्थानीय BJP नेताओं की खींचतान पर उठे बड़े सवाल

Wednesday, Sep 23, 2026-12:22 PM (IST)

ग्वालियर। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के अपने ही शहर ग्वालियर में एक कार्यक्रम के दौरान काले झंडे दिखाए जाने की घटना ने कई राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि कुशवाह समाज के कार्यक्रम में सिंधिया के संबोधन के दौरान विरोध क्यों हुआ, बल्कि बड़ा सवाल यह है कि क्या ग्वालियर की स्थानीय राजनीति में सिंधिया के प्रभाव को लेकर अब असंतोष के सुर उभरने लगे हैं? बेला की बावड़ी स्थित कुशवाह समाज के छात्रावास-सह-सामुदायिक भवन के भूमिपूजन कार्यक्रम में सिंधिया के भाषण के दौरान कुछ युवाओं ने नारेबाजी की और काले झंडे दिखाए। इसके बाद विरोध कर रहे लोगों और दूसरे पक्ष के बीच विवाद बढ़ गया। पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और मौके पर मारपीट के साथ कुर्सियां फेंके जाने की बात सामने आई। घटना का वीडियो भी सामने आया है।

इस पूरे घटनाक्रम की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक कड़ी स्थानीय भाजपा की अंदरूनी खींचतान को माना जा रहा है। विभिन्न रिपोर्टों में विरोध करने वालों को ग्वालियर सांसद भारत सिंह कुशवाह के समर्थकों से जोड़कर चर्चा की गई है। वजह के तौर पर यह बात सामने आई कि कुशवाह समाज के कार्यक्रम में स्थानीय समाज से जुड़े प्रमुख जनप्रतिनिधियों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला और केंद्रीय मंत्री सिंधिया को मुख्य अतिथि बनाए जाने को लेकर कुछ लोगों में नाराजगी थी। हालांकि, विरोध करने वालों के किसी राजनीतिक गुट से जुड़े होने की आधिकारिक पुष्टि अलग से सामने नहीं आई है।

PunjabKesari

यहीं से ग्वालियर की राजनीति का असली सवाल शुरू होता है।

सिंधिया लंबे समय से ग्वालियर-चंबल की राजनीति में प्रभावशाली चेहरा रहे हैं। लेकिन भाजपा में उनके आने के बाद स्थानीय संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच शक्ति-संतुलन का सवाल लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है। ग्वालियर की राजनीति में यह चर्चा भी होती रही है कि सिंधिया के करीबी माने जाने वाले नेताओं और उनके समर्थक नेटवर्क की स्थानीय राजनीति में भूमिका कितनी प्रभावशाली है।

प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट और स्थानीय स्तर पर सिंधिया समर्थक नेताओं की सक्रियता को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं होती हैं। ऐसे में जब किसी स्थानीय सांसद या दूसरे जनप्रतिनिधि के समर्थक सार्वजनिक मंच पर विरोध की स्थिति तक पहुंचते हैं, तो इसे केवल एक कार्यक्रम का विवाद मानकर नजरअंदाज करना आसान नहीं होता। यह भाजपा के भीतर स्थानीय स्तर पर प्रतिनिधित्व, सम्मान और राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर चल रही खींचतान का संकेत भी माना जा सकता है।

हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि सिंधिया का ग्वालियर में प्रभाव खत्म हो रहा है। लेकिन इतना जरूर है कि उनके कार्यक्रम में खुले तौर पर विरोध, काले झंडे और उसके बाद भाजपा समर्थकों के बीच टकराव ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या ग्वालियर में सिंधिया के प्रभाव को चुनौती देने वाले विरोध के सुर अब पहले से ज्यादा मुखर हो रहे हैं?

घटना के बाद सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर खेद जताया और प्रभावशाली नेताओं के बहकावे में युवाओं द्वारा ऐसा किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि कुशवाह समाज किसी की जागीर नहीं है और उच्च पद पर बैठकर शक्ति का गलत इस्तेमाल उचित नहीं है।

दूसरी ओर, सिंधिया ने हंगामे के बीच मंच से कहा कि उन्हें अपना काम करने दिया जाए और वह अपना काम करेंगे। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर हैं कि भाजपा का स्थानीय नेतृत्व इस घटनाक्रम को किस रूप में देखता है और क्या ग्वालियर में बढ़ती अंदरूनी खींचतान को नियंत्रित करने के लिए कोई राजनीतिक पहल होती है।

क्योंकि सवाल अब सिर्फ काले झंडों का नहीं, बल्कि ग्वालियर में बदलते राजनीतिक समीकरणों का है और आने वाले दिनों में यह तय करेगा कि यह विरोध महज एक कार्यक्रम तक सीमित रहता है या स्थानीय राजनीति में किसी बड़े असंतोष की शुरुआत बनता है।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Himansh sharma

Related News