14 साल बाद पूर्व खूंखार नक्सली का खुलासा, सरकारी कर्मियों की शिकायत पर किया था कलेक्टर का अपहरण,दावे से हड़कंप
Thursday, Mar 05, 2026-04:25 PM (IST)
(जगदलपुर): छतीसगढ़ में नक्सल के खिलाफ छतीसगढ़ सरकार और केंद्र सरकार का अभियान जारी है। लगातार प्रदेश में नक्सली सरेंडर करके मुख्यधारा में लौट रहे हैं। अब इसी कड़ी में पूर्व नक्सली ने एक ऐसा खुलासा किया है जिससे सनसनी मच गई है। 14 साल बाद पूर्व नक्सली के इस सनसनीखेज खुलासे के बाद हर कोई हैरान और स्तब्ध है।
4 साल बाद पूर्व नक्सली के सनसनीखेज खुलासे से हड़कंप
दरअसल साल 2012 में एक खतरनाक घटनाक्रम में सुकमा कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन के अपहरण हुआ था। इस वारदात को अंजाम देने वाले नक्सली नेता और केरलापाल एरिया कमेटी के तत्कालीन सचिव हेमला भीमा उर्फ आकाश के खुलासे से हलचल है। हेमला ने कलेक्टर के अपहरण को लेकर दावा करते हुए कहा है कि कलेक्टर से प्रताड़ित सरकारी कर्मियों की शिकायत पर ही सबक सिखाने के लिए एलेक्स पाल को अगवा किया गया था।
अप्रैल 2012 को किया था दिन दिहाड़े अगवा
21 अप्रैल 2012 को सुकमा में केरलपाल के मांझीपारा में जन समस्या निवारण शिविर से दौरान ही नक्सलियों ने दिन के उजाले में इस वारदात को अंजाम दिया था । हेमला ने अपहरण कांड के बारे में बताते हुए कहा है कि इस वारदात को नक्सलियों की स्थानीय एरिया कमेटी के कुछ लड़ाकों ने ही अंजाम दिया दिया था। फिर बाद में हिड़मा,सोनू की इस मामले में इंट्री हो गई थी। वहीं इस वारदात के दौरान दो पीएसओ भी शहीद हो गए थे। आकाश ने खुलासा करते हुए कहा कि कलेक्टर का अपहरण उनको खत्म करने के लिए नहीं सबक सिखाने के मकसद से किया था।
हेमला के मुताबिक सरकारी कर्मचारियों की शिकायतों के साथ ही लोगों में असंतोष को देखते हुए कलेक्टर के अपहरण की साजिश रची गई। हेमला ने बताया कि पहले एसपी भी कलेक्टर के साथ थे लेकिन बाद में वो सुकमा की ओर निकल गए और 15 जवान भी वापस सुकमा लौट गए। इसके बाद कलेक्टर केवल 2 पीएसओ के साथ शिविर में पहुंचे थे। आकाश ने खुलासा किया कि यदि एसपी के साथ अतिरिक्त बल मौके पर होता तो अपहरण की वारदात मुश्किल हो सकती थी।
हेमला ने जानकारी देते हुए बताया कि कलेक्टर अपहरण की कई बार रेकी की गई । तैयारा ऐसी थी कि शिविर में पुलिस और प्रशासन को इस बात की भनक तक नही लगी कि हथियार सहित हमारे साथी बैठे हैं। हम जैसे ही अपने मिशन में जुटे जवानों ने फायरिंग कर दी, लेकिन जवाब में हमारे साथियों ने भी मोर्चा संभाला जिसमें जवान शहीद हो गए। इसके बाद हम कलेक्टर को कुछ मीटर पैदल लेकर गए और अपनी बाइक पर लेकर फरार हो गए।
हेमला ने और जानकारी देते हुए कहा कि अपहरण के बाद दो दिनों तक कलेक्टर को बाइक पर ही स्थान बदलते हुए घुमाया गया। बाद में उन्हें सुकमा-बीजापुर सीमा पर स्थित ग्राम कुमडतुंग में रखा गया। इस दौरान कलेक्टर से उसके खिलाफ मिल रही शिकायतों के बारे में बात की गई।

