OBC आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की BJP सरकार को फटकार! सुनवाई में आने की बजाए बार बार वक्त मांग रहे सरकारी वकील

Friday, Jan 30, 2026-03:22 PM (IST)

भोपाल: मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण से जुड़े बेहद संवेदनशील मामलों में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की गंभीर लापरवाही उजागर हुई। न्यायमूर्ति नरसिंहा और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की खंडपीठ के समक्ष जब सीरियल नंबर 106 पर अंतिम बहस के लिए मामला पुकारा गया, तो राज्य सरकार की ओर से कोई भी अधिवक्ता मौजूद नहीं था। इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये पर शीर्ष अदालत ने नाराजगी जताते हुए खेद व्यक्त किया।

ओबीसी वर्ग के वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप जॉर्ज चौधरी ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि इस केस में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता समेत पांच वरिष्ठ वकीलों की नियुक्ति के बावजूद सुनवाई के वक्त अनुपस्थिति यह दर्शाती है कि सरकार ओबीसी आरक्षण को लेकर कितनी गंभीर है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अब तक हर पेशी पर सिर्फ समय मांगती रही है। मप्र महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष एवं पिछड़ा वर्ग मोर्चा की उपाध्यक्ष विभा पटेल ने कहा कि यह महज लापरवाही नहीं बल्कि ओबीसी समाज के अधिकारों के प्रति भाजपा सरकार की जानबूझकर की गई उपेक्षा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आरक्षण के मुद्दे पर ओबीसी वर्ग को गुमराह कर रही है।

ओबीसी पक्ष के अधिवक्ताओं के विशेष अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 4 फरवरी 2026 तय की है। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने स्वयं इन मामलों को हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर कराया था। हैरानी की बात यह है कि 27% ओबीसी आरक्षण कानून पर न तो हाईकोर्ट का स्टे है और न ही सुप्रीम कोर्ट की रोक, इसके बावजूद सरकार 13% पदों को होल्ड पर रखकर नियुक्तियां अटका रही है। इसे लेकर ओबीसी समाज में गहरा आक्रोश है।


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Content Editor

Vikas Tiwari

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