50 साल बाद आदिवासी अंचल में लौटी रबी खेती, रागी ने बदली धमतरी की तस्वीर
Monday, Jan 12, 2026-08:30 PM (IST)
रायपुर (पुष्पेंद्र सिंह): धमतरी जिले के वनाच्छादित और आदिवासी बहुल उच्चहन क्षेत्र में कृषि इतिहास का एक नया अध्याय जुड़ गया है। गंगरेल बांध के ऊपरी क्षेत्र में स्थित ग्राम डांगीमांचा और खिड़कीटोला में लगभग 50 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद रबी सीजन में संगठित खेती की वापसी हुई है।
कृषि विभाग द्वारा संचालित आत्मा (ATMA) योजना के अंतर्गत इन दोनों गांवों में कुल 35 एकड़ क्षेत्र में लघु धान्य फसल रागी (मिलेट) की खेती की जा रही है, जिसे क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। विशेष भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस उच्चहन आदिवासी अंचल में रागी जैसी पोषणयुक्त फसल की खेती से आजीविका, पोषण सुरक्षा और जलवायु अनुकूल कृषि को नई दिशा मिली है। आत्मा योजना के तहत किसानों को SMI (Systematic Millets Intensification) पद्धति, उन्नत बीज उत्पादन, आधुनिक तकनीक और बाजार से जुड़ाव की जानकारी दी जा रही है। हाल ही में आयोजित मिलेट महोत्सव के बाद आत्मा एवं कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ग्राम स्तर पर कृषक पाठशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में ग्राम पंचायत तुमराबहार के सरपंच श्री दीपक राम ध्रुव, विभागीय अधिकारी, 40 महिला कृषक और 32 पुरुष कृषक शामिल हुए। कृषक पाठशाला में रागी फसल की उन्नत खेती, फसल एवं पोषक तत्व प्रबंधन, कीट-रोग नियंत्रण, उत्पादन लागत कम कर अधिक लाभ अर्जित करने के उपायों के साथ-साथ रागी के स्वास्थ्य लाभ और बाजार संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को मिलेट आधारित आजीविका सुदृढ़ीकरण, जलवायु अनुकूल खेती और शासन की योजनाओं का लाभ लेकर आर्थिक रूप से सशक्त बनने के लिए प्रेरित किया गया। किसानों ने क्षेत्र में रागी की खेती को भविष्य में और अधिक विस्तार देने पर सहमति जताई।

