Gold Silver Price: दुनिया में युद्ध छिड़ा, फिर भी क्यों गिर रहे सोना-चांदी के दाम? जानिए और कितना सस्ता होगा Gold
Tuesday, Mar 24, 2026-01:40 PM (IST)
भोपाल: जब भी दुनिया में कहीं युद्ध होता है, या युद्ध के हालात बनते हैं, तो लोग सुरक्षित निवेश के लिए सोना-चांदी की तरफ भागते हैं, जिससे सोने और चांदी की कीमतें बढ़ने लगती हैं। लेकिन इस बार कहानी उल्टी हो गई है। ईरान युद्ध के बीच भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दिख रही है। सोने के दाम तो कम हो ही रहे हैं, साथी ही चांदी तो मानो ‘क्रैश’ ही हो गई है। तो इस बार आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? आईए जानते हैं।
पहले जानिए आज के भाव
मंगलवार को सर्राफा बाजार में भारी गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया। सोना और चांदी (Gold Silver Price) की कीमतों में अचानक आई बड़ी गिरावट ने बाजार में हड़कंप मचा दिया, खासकर ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है और आमतौर पर ऐसे हालात में कीमती धातुओं में तेजी देखने को मिलती है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सुबह करीब 10:20 बजे 2 अप्रैल 2026 डिलीवरी वाला सोना 1.31 फीसदी यानी 1800 रुपये से अधिक टूटकर 1,37,471 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। वहीं, 5 मई 2026 डिलीवरी वाली चांदी में और भी बड़ी गिरावट देखने को मिली। चांदी का भाव 7800 रुपये से ज्यादा गिरकर 2,17,366 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया।
अब बड़ा सवाल, युद्ध के बाद भी क्यों सस्ता हो रहा सोना-चांदी
अक्सर ऐसा होता है कि युद्ध के दौरान सोने और चांदी के दामों में बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिलती है। जैसा की पहले हो चुका है। लेकिन इस बार ईरान और अमेरिका के युद्ध के बीच सोने चांदी के दाम बढ़ने की बजाय घटे हैं, जिसके कुछ बड़े कारण हैं।
- ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव
- होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait ) पर खतरे की आशंका
- कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार
- ग्लोबल शेयर बाजारों में कमजोरी
- अमेरिकी फेड की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता

इस पर क्या कहना है विशेषज्ञों का?
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा गिरावट के पीछे बड़ी वजह हाल के महीनों में आई तेज तेजी के बाद मुनाफावसूली है। साथ ही, वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता ने सभी एसेट क्लास शेयर, बॉन्ड और कीमती धातुओं पर दबाव बनाया है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट लंबी अवधि के ट्रेंड में बदलाव का संकेत नहीं है, बल्कि एक short-term correction है। ऐसे समय में निवेशकों को घबराने के बजाय धैर्य बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

