उज्जैन से काशी तक गूंजा वैदिक समय: बाबा विश्वनाथ धाम में स्थापित हुई दुनिया की पहली विक्रमादित्य घड़ी
Sunday, Apr 05, 2026-06:54 PM (IST)
वाराणसी/उज्जैन: भारतीय संस्कृति और प्राचीन कालगणना की गौरवशाली परंपरा अब उज्जैन से निकलकर काशी तक पहुंच गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर विश्व की पहली विक्रमादित्य वैदिक घड़ी को वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में विधि-विधान के साथ स्थापित कर दिया गया है।
यह घड़ी 4 अप्रैल 2026 को विक्रम संवत 2083, वैशाख कृष्ण पक्ष द्वितीया के शुभ अवसर पर स्थापित की गई। इससे पहले 3 अप्रैल को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को यह घड़ी भेंट की थी। उज्जैन स्थित महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा विकसित यह वैदिक घड़ी केवल समय बताने का साधन नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन वैज्ञानिक और सांस्कृतिक विरासत का आधुनिक रूप है। यह घड़ी सूर्योदय के आधार पर संचालित होती है और एक दिन को 30 मुहूर्तों में विभाजित करती है।
इस घड़ी की खासियत यह है कि यह भारतीय मानक समय (IST) के साथ-साथ पंचांग, तिथि, नक्षत्र, योग, भद्रा और ग्रहों की स्थिति जैसी विस्तृत जानकारियां भी प्रदान करती है। इससे श्रद्धालु और नई पीढ़ी भारतीय कालगणना की वैज्ञानिक परंपरा से सीधे जुड़ सकेंगे। मध्यप्रदेश सरकार का लक्ष्य देश के सभी ज्योतिर्लिंगों और अयोध्या के श्रीराम मंदिर में भी इस वैदिक घड़ी की स्थापना करना है। यह पहल परंपरा और आधुनिक तकनीक के अद्भुत संगम के रूप में देखी जा रही है, जो भारतीय संस्कृति को नए स्वरूप में प्रस्तुत कर रही है।

