बीजेपी पूर्व प्रदेश अध्यक्ष की पत्नी का यू-टर्न: पेट्रोल-डीजल EMI बयान पर सफाई, अब कह दी यह बड़ी बात..
Sunday, May 24, 2026-03:44 PM (IST)
भोपाल। खजुराहो से बीजेपी सांसद और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की पत्नी स्तुति मिश्रा का एक सोशल मीडिया पोस्ट इन दिनों राजनीतिक और सोशल मीडिया हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। महंगाई और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर किए गए उनके शुरुआती तंज के बाद उठे विवाद ने अब एक नया मोड़ ले लिया है, जहां उन्होंने अपने बयान पर सफाई देते हुए इसे “गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया” बताया है। शनिवार सुबह किए गए एक फेसबुक पोस्ट में स्तुति मिश्रा ने मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों और तेल की कीमतों को लेकर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की थी। उन्होंने लिखा था कि आने वाले समय में हालात ऐसे हो सकते हैं कि “पेट्रोल-डीजल भी होम, कार और बिजनेस लोन की तरह ईएमआई पर मिलने लगे।
उनकी यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और इसे सरकार की नीतियों पर अप्रत्यक्ष कटाक्ष के रूप में देखा जाने लगा। विपक्षी खेमे में भी इस पोस्ट को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आईं, जिसके बाद मामला और गरमा गया। हालांकि, विवाद बढ़ता देख स्तुति मिश्रा ने बाद में लंबा स्पष्टीकरण जारी किया। अपने नए बयान में उन्होंने कहा कि उनकी पोस्ट को संदर्भ से हटाकर देखा गया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, विशेषकर युद्ध और तेल आपूर्ति में संभावित कमी का हवाला देते हुए कहा कि यह एक आगामी चुनौती पर चेतावनी थी, न कि किसी सरकार या संस्था के खिलाफ टिप्पणी।

उन्होंने अपने स्पष्टीकरण में यह भी जोड़ा कि नागरिकों की जिम्मेदारी है कि वे ऐसे समय में ऊर्जा संरक्षण और सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करें। साथ ही उन्होंने यह दावा किया कि उनकी टिप्पणी का उद्देश्य लोगों को जागरूक करना था, लेकिन कुछ लोगों ने इसे गलत अर्थों में प्रस्तुत किया।
अपने बयान में स्तुति मिश्रा ने प्रधानमंत्री के आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि इस समय देशवासियों को एकजुट होकर परिस्थितियों का सामना करना चाहिए और अनावश्यक आलोचना के बजाय समाधान की दिशा में सोचने की आवश्यकता है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का सिलसिला जारी है। एक ओर जहां उनके शुरुआती पोस्ट को लेकर चर्चा थमी नहीं है, वहीं दूसरी ओर उनके स्पष्टीकरण ने भी नई बहस को जन्म दे दिया है। फिलहाल यह मामला राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर सोशल मीडिया नैरेटिव और सार्वजनिक धारणा के बीच एक दिलचस्प बहस का विषय बन गया है।

