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छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी का कहर: कोरबा-पाली में 150 से ज्यादा चमगादड़ों की मौत, 46°C ने मचाई तबाही

Sunday, May 24, 2026-04:21 PM (IST)

कोरबा। (पुष्पेंद्र सिंह): छत्तीसगढ़ में पड़ रही भीषण गर्मी अब इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षियों और खेती-किसानी पर भी भारी पड़ने लगी है। प्रदेश के कई इलाकों में तापमान 46 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है। गर्म हवाओं और लगातार बढ़ते तापमान का असर वन्यजीवों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। कोरबा जिले के पाली क्षेत्र में नौकोनिया तालाब के आसपास बसेरा किए हुए 150 से अधिक प्रवासी चमगादड़ों की मौत हो गई है। प्रारंभिक तौर पर इनकी मौत का कारण भीषण गर्मी और हीट स्ट्रोक माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, पाली स्थित नौकोनिया तालाब के किनारे लगे ऊंचे पेड़ों पर हर वर्ष फरवरी और मार्च के दौरान हजारों प्रवासी चमगादड़ आकर डेरा जमाते हैं। इस बार भी बड़ी संख्या में चमगादड़ों ने यहां अपना बसेरा बनाया था, लेकिन पिछले कई दिनों से लगातार बढ़ रहे तापमान और गर्म हवाओं के कारण उनकी स्थिति बिगड़ने लगी। स्थानीय लोगों ने पेड़ों के नीचे बड़ी संख्या में मृत चमगादड़ों को गिरा हुआ देखा, जिसके बाद वन विभाग और संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई। विशेषज्ञों के अनुसार चमगादड़ों का सामान्य शारीरिक तापमान लगभग 38 डिग्री सेल्सियस रहता है। जब वातावरण का तापमान 40 डिग्री से ऊपर पहुंचता है तो उन्हें परेशानी होने लगती है। वहीं तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने पर उनके लिए हालात जानलेवा बन जाते हैं। लगातार गर्मी के संपर्क में रहने से वे हीट स्ट्रोक का शिकार हो जाते हैं और पेड़ों से नीचे गिरने लगते हैं। पाली क्षेत्र में हाल के दिनों में तापमान लगातार 43 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया है, जिसके चलते बड़ी संख्या में चमगादड़ों की मौत होने की आशंका जताई जा रही है।

स्थानीय प्रशासन और वन विभाग की टीम क्षेत्र में निगरानी बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि मृत चमगादड़ों की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए लगातार स्थिति पर नजर रखी जा रही है। आसपास के गांवों से भी गर्मी के कारण पक्षियों और अन्य जीवों के प्रभावित होने की सूचनाएं मिल रही हैं।

गर्मी का असर केवल वन्यजीवों तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि क्षेत्र भी इसकी मार झेल रहा है। पाली और आसपास के इलाकों में सब्जियों की फसलें तेज धूप और अत्यधिक तापमान के कारण खेतों में ही झुलसने लगी हैं। किसानों का कहना है कि पर्याप्त सिंचाई के बावजूद फसलें गर्मी सहन नहीं कर पा रही हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में तापमान में कमी नहीं आई तो पशु-पक्षियों के साथ-साथ कृषि क्षेत्र को भी भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। मौसम विभाग ने भी लोगों को दोपहर के समय घरों से बाहर निकलने से बचने और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की सलाह दी है।


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Content Editor

Himansh sharma

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