खैरागढ़ की कलम की बड़ी उड़ान, अब स्कूली किताबों में पढ़ेंगे विनय शरण सिंह की रचनाएं
Monday, Aug 31, 2026-06:40 PM (IST)
खैरागढ़: कला और संगीत की नगरी के रूप में अपनी अलग पहचान रखने वाले खैरागढ़ के साहित्य जगत के लिए एक और गौरवपूर्ण खबर सामने आई है। नगर के साहित्यकार विनय शरण सिंह की साहित्यिक रचनाओं को छत्तीसगढ़ के स्कूली पाठ्यक्रम की पुस्तकों में स्थान मिला है। यानी जिस कलम से खैरागढ़ की माटी, लोकजीवन, प्रकृति और छत्तीसगढ़ी संस्कृति की तस्वीर शब्दों में उकेरी गई, अब वही शब्द प्रदेश के स्कूली बच्चों की पढ़ाई का हिस्सा बनेंगे।
कक्षा 4 की किताब में कविता, सहायक वाचन में कहानी और शब्द-चित्र
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद की ओर से तैयार की गई कक्षा 4 की नई हिंदी पाठ्यपुस्तक ‘वीणा’ में विनय शरण सिंह की एक कविता को शामिल किया गया है। वहीं प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं के लिए तैयार सहायक वाचन की पुस्तकों में भी उनकी कविता और कहानी को स्थान दिया गया है। ‘वीणा’ स्वयं स्थानीय संदर्भों, संस्कृति और बच्चों के अनुभवों से जोड़कर भाषा सीखने पर जोर देने वाली पाठ्यपुस्तक है।
उनकी रचना में बस्तर की जीवनरेखा इंद्रावती नदी के प्राकृतिक, सांस्कृतिक और जीवनगत पक्षों को शब्दों के माध्यम से सामने लाया गया है। यह केवल नदी का वर्णन नहीं, बल्कि नदी के साथ जुड़े छत्तीसगढ़ के जीवन, प्रकृति और संस्कृति को समझने का अवसर भी देता है।

साहित्य से किताब तक पहुंची खैरागढ़ की आवाज
विनय शरण सिंह लंबे समय से कविता, कहानी, व्यंग्य और साहित्य लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनकी रचनाओं में स्थानीय परिवेश और आम जीवन की सहज झलक दिखाई देती है। यही वजह है कि उनकी रचनाएं पाठकों से सीधे संवाद करती हैं।
उनकी साहित्यिक रचनाएं बाल वाटिका, अहा जिंदगी, राजस्थान पत्रिका, ककसाड़ और अड़हास जैसे पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होने की जानकारी भी सामने आई है। उनकी रचनाओं को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना उनके साहित्यिक योगदान को मिली महत्वपूर्ण पहचान के तौर पर देखा जा रहा है।
बच्चों को अपनी मिट्टी और संस्कृति से जोड़ेंगे शब्द
इस उपलब्धि की सबसे खास बात यह है कि पाठ्यपुस्तक में शामिल रचनाओं के माध्यम से बच्चों को सिर्फ हिंदी भाषा पढ़ने का मौका नहीं मिलेगा, बल्कि वे छत्तीसगढ़ की प्रकृति, लोकजीवन, संस्कृति और क्षेत्रीय परिवेश को भी साहित्य के माध्यम से समझ सकेंगे।
शिक्षा में स्थानीय संदर्भों को शामिल करने पर अब विशेष जोर दिया जा रहा है। ‘वीणा’ के संबंध में प्रकाशित एक अध्ययन भी बताता है कि पाठ्यपुस्तक में स्थानीय खेल, कला, संस्कृति और समुदाय आधारित अनुभवों को शिक्षण से जोड़ने की कोशिश की गई है।

खैरागढ़ के लिए क्यों खास है यह उपलब्धि?
खैरागढ़ पहले से ही कला और संगीत के क्षेत्र में अपनी पहचान रखता है। यहां का विश्वविद्यालय संगीत, चित्रकला, मूर्तिकला, लोककला और साहित्य से जुड़े अध्ययन के लिए जाना जाता है। छत्तीसगढ़ की पाठ्यपुस्तक सामग्री में भी खैरागढ़ के साहित्यिक योगदान की झलक पहले से मिलती रही है; SCERT की एक पाठ्यपुस्तक में विनय शरण सिंह का नाम लेखक दल और अनुवादक के रूप में दर्ज है। ऐसे में अब उनकी रचनाओं का विद्यार्थियों की किताबों में पहुंचना खैरागढ़ की साहित्यिक पहचान को और मजबूत करता है।
साहित्यकार के लिए सबसे बड़ा सम्मान
किसी लेखक की रचना का पत्र-पत्रिका में प्रकाशित होना निश्चित रूप से उपलब्धि है, लेकिन जब वही रचना स्कूली बच्चों की किताब में पहुंचती है, तो उसका दायरा कई गुना बढ़ जाता है। अब विद्यार्थी उनकी रचनाओं को पढ़ेंगे, उनके शब्दों पर चर्चा करेंगे और उनके माध्यम से अपने आसपास के समाज और प्रकृति को समझेंगे। खैरागढ़ के लिए यह इसलिए भी खास है क्योंकि अब यहां की साहित्यिक आवाज प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों के स्कूलों तक पहुंचेगी।

