उपचुनाव के बीच कांग्रेस में घमासान, विधायक की शिकायत पहुंची हाईकमान तक
Thursday, Jul 23, 2026-06:38 PM (IST)
भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस में उभरा आंतरिक विवाद अब प्रदेश की सीमाओं से निकलकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच गया है। आगर मालवा जिले के नलखेड़ा में सार्वजनिक मंच से सामने आई बयानबाजी के बाद कांग्रेस के भीतर डैमेज कंट्रोल की कवायद तेज हो गई है। हालांकि, पार्टी के वरिष्ठ नेता इस पूरे घटनाक्रम पर खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से जब इस विवाद को लेकर मीडिया ने सवाल किया तो उन्होंने इसे पार्टी का आंतरिक मामला बताते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय सिंह ने पूरे विवाद को ही नकारते हुए कहा कि नलखेड़ा में ऐसा कोई घटनाक्रम नहीं हुआ।
दूसरी ओर, विवाद के केंद्र में रहे सुसनेर विधायक भैरों सिंह परिहार भी फिलहाल संयमित नजर आए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कुछ कहने से परहेज किया, लेकिन इतना जरूर संकेत दिया कि मामला अभी शांत नहीं हुआ है। परिहार ने कहा कि उपचुनाव के चलते वे इस विषय पर कोई बयान नहीं देंगे क्योंकि पार्टी हाईकमान की ओर से फिलहाल चुप रहने के निर्देश हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधायक के इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि मामला अब दिल्ली स्थित कांग्रेस नेतृत्व के संज्ञान में पहुंच चुका है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि उपचुनाव समाप्त होने के बाद पार्टी संगठन इस विवाद पर विस्तृत चर्चा कर सकता है।
क्या था पूरा विवाद?
दरअसल, पिछले सप्ताह आगर मालवा के नलखेड़ा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस विधायक भैरों सिंह परिहार ने सार्वजनिक मंच से अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं पर नाराजगी जाहिर कर दी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस संगठन की बैठक आयोजित की गई, लेकिन उन्हें इसकी सूचना तक नहीं दी गई। इसे उन्होंने अपने राजनीतिक सम्मान की अनदेखी बताया।
इतना ही नहीं, परिहार ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा था कि संगठन में हो रही गतिविधियों पर शीर्ष नेतृत्व ध्यान नहीं दे रहा है। उनके इस बयान के बाद प्रदेश कांग्रेस में सियासी हलचल तेज हो गई थी।
फिलहाल शांत, लेकिन खत्म नहीं हुआ विवाद
हालांकि अब पार्टी के अधिकांश नेता सार्वजनिक तौर पर इस विवाद पर बोलने से बच रहे हैं, लेकिन नेताओं के बयानों से यह स्पष्ट है कि मामला पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। उपचुनाव के बाद कांग्रेस संगठन के भीतर इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तय होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी इस अंदरूनी असंतोष को किस तरह संभालती है और क्या सभी नेताओं के बीच मतभेद दूर हो पाते हैं।

