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दतिया उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी की बढ़ीं मुश्किलें! संपत्ति छिपाने की शिकायत, क्या मीनाक्षी नटराजन जैसा होगा हाल?

Friday, Jul 17, 2026-04:51 PM (IST)

दतिया। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले राजनीतिक माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। अब चुनावी मुकाबला केवल प्रचार और रणनीति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह के चुनावी हलफनामे (एफिडेविट) को लेकर नया विवाद सामने आने से सियासी सरगर्मियां और तेज हो गई हैं। दतिया के गोविंद राहुल देव सिंह ने जिला निर्वाचन अधिकारी और कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपते हुए आरोप लगाया है कि कांग्रेस प्रत्याशी ने अपनी संपत्ति का पूरा और सही विवरण नामांकन पत्र में प्रस्तुत नहीं किया है।

शिकायत में दावा किया गया है कि हलफनामे में दर्ज संपत्ति संबंधी जानकारी में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को स्पष्ट नहीं किया गया। आरोप है कि घनश्याम सिंह ने हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) की संपत्ति का उल्लेख तो किया, लेकिन यह नहीं बताया कि वह संपत्ति उन्हें किस आधार पर प्राप्त हुई। शिकायतकर्ता का कहना है कि हलफनामे में एक ओर संपत्ति को स्वअर्जित बताया गया है, जबकि दूसरी ओर उसे पारिवारिक बंटवारे से जोड़ने का उल्लेख किया गया है, जिससे दस्तावेज़ में विरोधाभास दिखाई देता है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि परिवार के कुछ सदस्यों की जानकारी दर्ज नहीं कर उनके अधिकारों की अनदेखी की गई है।

PunjabKesariगोविंद राहुल देव सिंह ने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल को लाभ या हानि पहुंचाना नहीं, बल्कि एक नागरिक के रूप में तथ्यों को निर्वाचन आयोग के संज्ञान में लाना है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि आवश्यक हुआ तो इस पूरे मामले की शिकायत केंद्रीय निर्वाचन आयोग (ECI) के समक्ष भी प्रस्तुत की जाएगी।

इधर, दतिया उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी भी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर चुकी है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के नेतृत्व में 32 सदस्यीय चुनाव संचालन समिति का गठन किया गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की लगातार बैठकों और चुनावी तैयारियों से साफ है कि पार्टी इस सीट को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।

घनश्याम सिंह के खिलाफ दर्ज शिकायत के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कई लोग इस घटनाक्रम की तुलना मध्य प्रदेश की राजनीति के पुराने चर्चित मामलों से कर रहे हैं और यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह विवाद चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, अभी तक जिला निर्वाचन अधिकारी या निर्वाचन आयोग की ओर से शिकायत पर कोई आधिकारिक निर्णय या टिप्पणी सामने नहीं आई है।

फिलहाल पूरा मामला जांच और निर्वाचन अधिकारियों की प्रक्रिया पर निर्भर है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है तो इसका चुनावी समीकरण पर असर पड़ सकता है, वहीं यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो विवाद स्वतः समाप्त हो जाएगा। ऐसे में दतिया उपचुनाव में अब सभी की नजर प्रशासन और निर्वाचन आयोग के अगले कदम पर टिकी हुई है।


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Content Editor

Himansh sharma

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