खैरागढ़ में पुरानी रंजिश में जानलेवा हमला, ग्रामीणों ने पकड़े आरोपी, मारपीट का वीडियो बना चर्चा का विषय
Monday, Feb 02, 2026-04:05 PM (IST)
खैरागढ़ (हेमंत पाल) : खैरागढ़ जिले के छुईखदान थाना क्षेत्र में पुरानी पारिवारिक रंजिश के चलते हुए जानलेवा हमले का मामला अब सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के कारण सुर्खियों में है। घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों द्वारा आरोपियों को पकड़ने और उनके साथ की गई अभद्रता का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने कानून व्यवस्था और भीड़ के आक्रोश पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जानकारी के अनुसार, ग्राम अछोली निवासी चंद्रकुमार जंघेल और ग्राम पेंड्रावन निवासी यशवंत वर्मा मोटरसाइकिल से ग्राम कोटरा पहुंचे थे। दोनों आरोपी पुरानी पारिवारिक रंजिश के चलते ग्राम कोटरा निवासी धुरूराम जंघेल के घर पहुंचे और उस पर जान से मारने की नीयत से हमला कर दिया। इस हमले में धुरूराम जंघेल गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया।

वारदात के बाद दोनों आरोपी मौके से भागने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन ग्रामीणों ने उन्हें पकड़ लिया। इसी दौरान गांव में तनाव की स्थिति बन गई। आरोपियों को पकड़े जाने और उनके साथ की गई मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिससे इलाके में आक्रोश और चर्चा दोनों बढ़ गई। सूचना मिलते ही छुईखदान थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया। पुलिस ने भीड़ को शांत कराया और लोगों से कानून अपने हाथ में न लेने की अपील की। इसके बावजूद वायरल वीडियो ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर ग्रामीणों को कानून हाथ में लेने का अधिकार किसने दिया और ऐसी स्थिति में पुलिस की भूमिका क्या होनी चाहिए।

पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि कुछ वर्ष पूर्व उनके परिवार के साथ हुई मारपीट की घटना का बदला लेने के उद्देश्य से उन्होंने इस वारदात को अंजाम दिया। पीड़ित की पत्नी श्रीमती सकुन बाई जंघेल की रिपोर्ट पर थाना छुईखदान में अपराध क्रमांक 33 वर्ष 2026 के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त हथियार और मोटरसाइकिल जब्त की है। गिरफ्तार आरोपियों में
चंद्रकुमार जंघेल उम्र 20 वर्ष निवासी अछोली थाना धमधा जिला दुर्ग यशवंत वर्मा उम्र 23 वर्ष निवासी पेंड्रावन थाना धमधा जिला दुर्ग शामिल हैं। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार किया है। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में पेश किया गया, जहां से न्यायालय के आदेश पर उन्हें उप जेल सलोनी भेज दिया गया। यह मामला अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि भीड़ के न्याय और कानून व्यवस्था की मजबूती पर गंभीर बहस का विषय बन गया है। सवाल साफ है अपराधी चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, सजा देने का अधिकार सिर्फ कानून को है, भीड़ को नहीं।

