दिग्विजय सिंह की समिति ने की थी UGC में बदले नियमों की सिफारिश! सवर्ण समाज बता रहा ‘काला कानून’

Tuesday, Jan 27, 2026-05:43 PM (IST)

भोपाल : देशभर में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों में बड़ा बदलाव किया है। एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग इस बदलाव को छात्रों की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम बता रहा है। वहीं सवर्ण समाज इसका जबरदस्त विरोध कर रहा है। इसी बीच एक बड़ी जानकारी निकलकर सामने आई है कि इस बदलाव की नींव मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम, कांग्रेस के दिग्गज नेता व राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने दिसंबर 2025 में रखी थी। दिग्विजय सिंह शिक्षा, महिला, बाल और युवा मामलों की संसदीय समिति के चेयरमैन हैं। इन्हीं की अध्यक्षता वाली इस बहुदलीय समिति की समीक्षा के बाद UGC ने अपने नियमों में बदलाव किया है, जिसे लेकर सवर्ण समाज काले कानून का नाम देकर विरोध कर रहा है।
नए नियमों से क्या है दिग्विजय सिंह का कनेक्शन 
जानकारी के मुताबिक, UGC (University Grants Commission) ने शुरुआती ड्राफ्ट में OBC जातियों को जाति-आधारित भेदभाव (Discrimination) के दायरे में नहीं रखा गया था। इस पर दिग्विजय सिंह के नेतृत्व वाली शिक्षा संबंधी संसदीय समिति ने सिफारिश की कि उच्च शिक्षा में पिछड़ों के साथ होने वाले भेदभाव को भी उतनी ही गंभीरता से लिया जाए जितना SC-ST के मामले में लिया जाता है। इसके बाद ही OBC को भी अंतिम विनियम में शामिल किया गया।
इसके साथ दिग्विजय सिंह की समिति ने यूजीसी में बनने वाली 'इक्विटी कमेटी' (Equity Committee) में SC, ST और OBC वर्गों के प्रतिनिधियों की संख्या आधे से अधिक (50% से ज्यादा) करने की सिफारिश की। इसका उद्देश्य ये सुनिश्चित करना है कि इक्विटी कमेटी भेदभाव की शिकायतों का निपटारा निष्पक्ष हो और वंचित वर्गों की बात मजबूती से रखी जा सके। 

क्यों हो रहा विरोध

इक्विटी कमेटी कमेटी में जनरल कैटेगरी से किसी सदस्य को नहीं रखने को लेकर विरोध हो रहा है। ऐसे में सवर्ण समाज के लोगों बिना गुनाह किए गुनहगार हो जाने डर सता रहा है। जबकि, बिना पीड़ित हुए ही SC-ST-OBC छात्र पीड़ित दिखने लगे हैं। इसके अलावा एक और बदलाव किया गया है जिसके तहत ड्राफ्ट में एक बहुत महत्वपूर्ण प्रावधान ये था कि अगर कोई छात्र जानबूझकर या दुर्भावना से झूठी शिकायत करे तो उसे आर्थिक दंड या कॉलेज से सस्पेंड किया जा सकता है। ये प्रावधान झूठी शिकायतों को रोकने के लिए था,लेकिन अंतिम नियमों से ये प्रावधान पूरी तरह हटा दिया गया है। ऐसे में सवर्ण छात्रों को डर सता रहा है कि झूठी शिकायतों को मामले बढ़ सकते हैं।


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meena

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