कांग्रेस ये काम भी कर देती तो नहीं जाती तीसरी सीट,BJP की सारे प्लान हो जाते फेल, खुद की ये गलती पड़ी बहुत भारी
Thursday, Jun 11, 2026-07:28 PM (IST)
(भोपाल): MP की राजनीति में जो मुद्दा सबसे ज्यादा गूंज रहा है वो है कांग्रेस राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने का मामला। इस मुद्दे को लेकर बीजेपी और कांग्रेस में एक दूसरे पर तगड़े प्रहार हो रहे हैं और कटघरे में खड़ा किया जा रहा है। बेशक नामांकन निरस्त होने के लिए कांग्रेस बीजेपी और रिटर्निंग अधिकारी पर सवाल उठा रही है लेकिन इस मामले में कांग्रेस की एक चूक पर भी सवाल उठ रहे हैं। वो चूक है डमी कैंडिडेट नहीं भरने की। इसको लेकर कांग्रेस पर प्रश्न उठाए जा रहे हैं। हालांकि नामांकन निरस्त होने पर प्रदेश के कई नेता भी सवालों के घेरे में हैं। कुछ नेताओं की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है लेकिन अभी नेतृत्व बोलने के मूड में नहीं है। राज्यसभा उम्मीदवार तय करने से लेकर नामांकन निरस्त होने तक अनेक चूकें सामने आई जिससे कांग्रेस की परेशानी बढ़ाई ।
डमी कैंडिडेट नहीं उतारने पर उठ रहे सवाल
सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है कि कांग्रेस ने राज्यसभा के लिए पार्टी से कोई डमी कैंडिडेट तक नहीं उतारा जो अक्सर ऐसे चुनावों में उतारा जाता है। दरअसल इस प्रक्रिया में कांग्रेस की सबसे बड़ी चूक डमी कैंडिडेट के मामले में हुई। पार्टी के दिग्गज नेताओं ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया और डमी कैंडिडेट भरने के विकल्प को नहीं अपनाया। ऐसे में अगर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त भी हो जाता तो कांग्रेस के पास दूसरा प्रत्याशी तो होता।
दूसरी गलती कांग्रेस इस मामले में गोपनीयता नहीं बना सकी। इसकी जानकारी बीजेपी के पास पहुंच गई और भगवा पार्टी अगली प्लानिंग मे लग गई।
बीजेपी शुरु से ही तीसरी सीट पर नजर लगाए थी, क्योंकि संख्या बल के हिसाब से बीजेपी को केवल 10 अतिरिक्त वोटों की जरुरत थी। सीएम मोहन यादव ने प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ रणनीति बनाई और तीसरी सीट पर बीजेपी प्रत्याशी उतारा। इसी का नतीजा था कि शीर्ष नेतृत्व को भरोसे में लेकर आधी रात बीजेपी ने महेश केवट के नाम का ऐलान कर दिया।
इस पूरी प्रक्रिया में कांग्रेस की कमियां
दरअसल शुरु से ही बीजेपी की तीसरी सीट पर तैयारियां जबर्दस्त रही। जैसे-जैसे माहौल बनाया गया और कुछ हल्के फुल्के अंदाज में बयान देकर कांग्रेस की धड़कन बढ़ाई गई वो गौर करने लायक थीं। वहीं टिकट वितरण से लेकर नामांकन पत्र जमा करने तक कांग्रेस के लिए कुछ आसान नहीं रहा और इस दवाव मे वो कुछ गलतियां कर गई।
कांग्रेस विधायकों के खरीद फरोख्त की आशंका में उलझी रही
दरअसल बीजेपी ने कांग्रेस नेताओं को उनके विधायकों को बचाने की कवायद में उलझा दिया था। क्रास वोटिंग के डर से कांग्रेस के नेता विधायकों को सुरक्षित करने में ही लगे रहे और बीजेपी अपनी अगली प्लानिंग में जुटी रही। इसी बीच बीजेपी ने रिटर्निंग अफसर को शिकायत करके नटराजन का नामांकन निरस्त करा दिया।

