सरकारी नौकरी सचिव की, पोस्टर में बने ‘महाराज’!पंचायत सचिव के कथा-वाचन पर उठे सवाल
Wednesday, Sep 02, 2026-12:18 PM (IST)
हरदा (राकेश खरका): जनपद पंचायत खिरकिया की ग्राम पंचायत हसनपुरा और ढोलगांव कलां का जिम्मा संभालने वाले पंचायत सचिव के धार्मिक कथा में कथावाचक की भूमिका निभाने का मामला सामने आया है। सामने आए पोस्टर में पंचायत सचिव सुरेश राजपूत को ‘श्री सुरेश जी महाराज’ के नाम से कथावाचक बताया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव के पंचायत से अनुपस्थित रहने के कारण उन्हें शासन की योजनाओं का लाभ लेने और अपनी समस्याओं के समाधान के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पंचायत में साफ-सफाई सहित अन्य व्यवस्थाओं को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। अब सवाल यह है कि क्या कथा-वाचन के लिए सचिव ने विभाग से विधिवत अनुमति और अवकाश लिया है? यदि लिया है तो उसकी जांच और जानकारी सामने आना जरूरी है।
मध्य प्रदेश के हरदा जिले की जनपद पंचायत खिरकिया क्षेत्र की ग्राम पंचायत हसनपुरा के सचिव इन दिनों एक धार्मिक आयोजन के पोस्टर को लेकर चर्चा में हैं। सामने आए पोस्टर में संबंधित कर्मचारी को ‘श्री सुरेश जी महाराज’ के नाम से कथावाचक बताया गया है। पोस्टर के अनुसार ग्राम सांगवा माल में 1 से 5 सितंबर 2026 तक ‘संगीतमय विशेष आध्यात्मिक पुराण कथा’ का आयोजन प्रस्तावित है। इसमें कथावाचक के तौर पर ‘श्री सुरेश जी महाराज’ का नाम दर्ज है। मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि बताया जा रहा है कि पोस्टर में कथावाचक के रूप में प्रचारित व्यक्ति ग्राम पंचायत हसनपुरा के पंचायत सचिव और शासकीय कर्मचारी हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सरकारी सेवा में रहते हुए वे धार्मिक आयोजन में कथावाचक की भूमिका किस हैसियत से निभा रहे हैं और क्या इसके लिए विभाग से विधिवत अनुमति ली गई है?

जब चाहा छुट्टी लेकर ‘महाराज’ बनना कितना जायज?
सरकारी कर्मचारियों की निजी और सार्वजनिक गतिविधियों को लेकर सेवा आचरण एवं अवकाश संबंधी नियम लागू होते हैं। ऐसे में यदि कोई कर्मचारी अपनी सरकारी जिम्मेदारियों से अवकाश लेकर धार्मिक कथा-वाचन या अन्य गतिविधि में सक्रिय रहता है, तो यह जांच का विषय हो सकता है कि अवकाश किस आधार पर स्वीकृत किया गया और क्या सक्षम अधिकारी से आवश्यक अनुमति ली गई थी।
यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि ग्राम पंचायत के सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर जिम्मेदारी संभाल रहे कर्मचारी को कथा-वाचन के लिए अवकाश और अनुमति किसने दी? यदि अनुमति ली गई है तो उसकी जानकारी सामने आनी चाहिए। वहीं, यदि बिना अनुमति सरकारी ड्यूटी से अनुपस्थित होकर इस तरह की गतिविधि की जा रही है, तो संबंधित विभाग को मामले की जांच करनी चाहिए।
पोस्टर में खुद को बताया ‘श्री सुरेश जी महाराज’
सामने आए पोस्टर में बड़े अक्षरों में ‘संगीतमय विशेष आध्यात्मिक पुराण कथा’ का उल्लेख किया गया है। इसमें कथावाचक के तौर पर ‘श्री सुरेश जी महाराज (सांगवा माल, जिला हरदा)’ लिखा गया है। पोस्टर में मोबाइल नंबर भी प्रकाशित किया गया है। आयोजन स्थल के रूप में श्री जागेश्वर धाम मंदिर प्रांगण, ग्राम सांगवा माल, तहसील खिरकिया, जिला हरदा का उल्लेख है। पोस्टर के मुताबिक कथा का आयोजन 1 से 5 सितंबर 2026 तक किया जाना है।
पंचायत के कामकाज पर भी उठे सवाल
ग्राम पंचायत सचिव का पद पंचायत के प्रशासनिक कामकाज से सीधे जुड़ा होता है। पंचायत से संबंधित विभिन्न कार्यों, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और ग्रामीणों की समस्याओं के निराकरण में सचिव की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत सचिव के नियमित रूप से उपलब्ध नहीं रहने के कारण पंचायत के कामकाज पर असर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने पंचायत में साफ-सफाई, स्वच्छता और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठाए हैं। बताया जा रहा है कि सचिव सुरेश राजपूत के पास दो ग्राम पंचायतों का प्रभार है। ऐसे में धार्मिक कथा में उनकी सक्रिय भूमिका और सरकारी जिम्मेदारियों के निर्वहन को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से जांच की मांग की
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की ओर से पंचायतों के माध्यम से ग्रामीणों को विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए संसाधन और राशि उपलब्ध कराई जाती है। ऐसे में पंचायत सचिव की जिम्मेदारी है कि वह ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ दिलाने और पंचायत के कामकाज को सुचारू रखने में अपनी भूमिका निभाएं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की जांच की जाए। खास तौर पर यह जांच होनी चाहिए कि कथा-वाचन के लिए सचिव ने अवकाश लिया था या नहीं, यदि लिया था तो किस अधिकारी ने स्वीकृत किया और क्या धार्मिक आयोजन में कथावाचक के रूप में शामिल होने की विभागीय अनुमति दी गई थी।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या जांच करता है और सरकारी कर्मचारी के धार्मिक कथा-वाचन को लेकर सामने आए सवालों पर क्या स्थिति स्पष्ट होती है। चार गांवों के ग्रामीण सचिव की अनुपलब्धता के कारण सेवाओं से वंचित होने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि ग्राम पंचायत के कई कार्य अधूरे होने की बात भी कही जा रही है।

